कैंपस पेज की लीड ::
युवा इंटरनेट के गुलाम नहीं मालिक बनें : डॉ. माधव कौशिक
बोले- 21वीं सदी में संचार क्रांति। इंटरनेट ने पूरी दुनिया को बना दिया है छोटा
- पीजीजीसी सेक्टर- 11 में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन में पहुंचे दुनियाभर के विशेषज्ञ
क्रॉसर
- विशेषज्ञों बोले- भाषा पुल का काम करती हैं गतिरोध का नहीं
- कॉलेज व चंडीगढ़ साहित्य अकादमी की ओर से हुआ संगोष्ठी का आयोजन
फोटो---
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। भाषा हमेशा पुल का काम करती है गतिरोध का नहीं। जिस तरह तकनीक में बदलाव आया उसी तरह समाज में भी बदलाव दिख रहा है और उसी के अनुरूप साहित्यकारों ने काम किए, लेकिन सरोकार भाषाओं के एक जैसे रहे। 21वीं सदी में संचार क्रांति आई है। इंटरनेट ने पूरी दुनिया को छोटा बना दिया है। मेरा युवाओं से आग्रह है कि वे इंटरनेट के गुलाम नहीं मालिक बनें। यह बात चंडीगढ़ साहित्य अकादमी अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने पीजीजीसी सेक्टर- 11 में इक्कीसवीं सदी का हिंदी व पंजाबी साहित्य संवेदना और शिल्प विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी बतौर मुख्य अतिथि कही। यह संगोष्ठी वीरवार को चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के सहयोग से कराई गई।
डॉ. माधव कौशिक ने कहा कि समाज को जो भी खतरा समय समय पर लगा उसे साहित्यकारों ने अपनी कलम के जरिये उजागर किया। लोगों को साहित्य सृजन से जगाने की कोशिश की। साहित्य दर्पण ही नहीं दीपक भी है। साहित्यकार समाज को दृष्टि देने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सृजनात्मक साहित्य को लोग कम पढ़ते हैं, लेकिन आलोचना अधिक लिखते हैं जबकि मुसीबतों से आगाह कर रास्ता दिखाने का यह काम साहित्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि ग्लोबलाइजेशन से दिक्कतें जरूर हुई हैं, लेकिन इससे कुछ रास्ते और खुले हैं। यह सदी बुरी नहीं है। इसका प्रयोग ठीक से करें। सभ्यता संस्कृति को जितना हो पूरी दुनिया में पहुंचाने का कार्य करें। आने वाला समय भारतीय साहित्यकारों के लिए और बेहतर होगा। इससे पूर्व प्राचार्या प्रो. रमा अरोरा ने अतिथियों का स्वागत किया और परिचय कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. मुकेश अरोड़ा व संचालन डॉ. परमजीत सिंह ने किया।
बॉक्स
परिणाम जल्दी पाने की इच्छा न करें
केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के अध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित ने कहा कि जब भी हम आने वाले कल पर विमर्श करें तो सबसे पहले भारतीय मूल व संस्कृति पर ध्यान दें। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि बहुत जल्द परिणाम पाने की इच्छा न करें। समय का इंतजार करें। उन्होंने कहा कि रचना कालजयी तभी होगी जब समाज की चिंता को उसमें शामिल करेंगे।
कई पुस्तकों का विमोचन
इस अवसर पर अप्रवासी कथाकार इंग्लैंड दर्शन धीर ने अपनी पुस्तक आजमाइश का विमोचन किया। उन्होंने विदेशों में पंजाबी साहित्य की लोकप्रियता के विषय में जानकारी दी। विशेष अतिथि कथाकार अमेरिका पी. भानु ने मणि लेखक कैसे बनी पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने अमेरिका में हिंदी के बढ़ते प्रभाव के विषय में बताया। मुख्य वक्ता प्रोफेसर चमनलाल ने हिंदी की विभिन्न विधाओं में संवेदना पर अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने साहित्य बाजार और मीडिया, तृतीय लिंग, प्रवासी साहित्य आदि के विषय में अपने विचार प्रस्तुत किए। इस मौके पर प्रोफेसर सुखदेव सिंह मिन्हास की दो पुस्तकों का विमोचन हुआ, जिसमें दलित साहित्य में बौद्ध दर्शन शामिल है। पीयू के हिंदी विभाग अध्यक्ष डॉक्टर गुरमीत सिंह ने मीडिया में हिंदी के बढ़ते हुए प्रभाव को बताया। डॉ. अशोक कुमार, एमसीएम से डॉ. सरिता चौहान, डॉ. प्रतिभा कुमारी ने भी विचार रखे।