लोहड़ी पर राजेश को मिल सकता है मेयर टिकट का तोहफा
- आज होने वाली बीजेपी की बैठक में राजेश कालिया के नाम पर मुहर लगने की उम्मीद
- बैठक में सभी पार्षदों को सुबह 9.30 बजे पार्टी कार्यालय में बुलाया गया
अनुभव अवस्थी
चंडीगढ़। भाजपा से राजेश कालिया का मेयर उम्मीदवार बनना लगभग तय माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो मेयर के नाम के लिए भरत कुमार और राजेश कालिया की फाइल आलाकमान को सौंप दी गई है। इसमें लंबे विचार-विमर्श के बाद राजेश के नाम सहमति बन गई है। हालांकि, अभी इसकी औपचारिकता घोषणा होना बाकी है। अगर ऐसा होता है कि एक तरह से भाजपा राजेश को लोहड़ी का तोहफा देगी।
वहीं, इस संदर्भ में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन ने बताया कि शनिवार को सेक्टर-33 स्थित बीजेपी कार्यालय कमलम में सुबह 9.30 बजे से सभी पार्षदों की मीटिंग बुलाई गई है, जिसमें चंडीगढ़ प्रभारी प्रभात झा अलग-अलग पार्षदों से बातचीत करेंगे। टंडन ने कहा जिसे पार्षद पसंद करेंगे, उसे ही मेयर का उम्मीदवार बनाया जाएगा। अभी मेरे लिए कुछ कह पाना संभव नहीं है।
फिट हो रहा लोकसभा का चुनावी गणित
आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए सभी पार्टियां जातिगत आंकड़े बैठाने की जुगत में हैं। भाजपा इस बार वाल्मीकि समाज के प्रत्याशी राजेश कालिया पर दांव लगाने को तैयार है। भरत कुमार भी इस रेस में शामिल हैं, लेकिन वाल्मीकि समाज में राजेश की अधिक पकड़ होने के चलते उन्हें भाजपा का उम्मीदवार बनना लगभग तय है।
इसलिए भरत पर भारी राजेश
इस बार शहर में मेयर के लिए सीट आरक्षित है। इसका लाभ हर दल लेना चाहता है। सिटी में वाल्मीकि समाज का वोटर एक लाख से अधिक है, जोकि कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक बताया जा रहा है। भाजपा राजेश कालिया को मेयर बनाकर कांग्रेस को गहरी चोट देने की फिराक में है। जहां तक भरत की बात है, तो उनका अपने समाज में उतना अधिक प्रभाव नहीं है, जितना कि राजेश का। इसके चलते भरत की अपेक्षा राजेश का पलड़ा भारी बताया जा रहा है।
14 जनवरी से है नामांकन
चंडीगढ़ में मेयर एक साल के लिए चुना जाता है। इस बार मेयर के लिए आरक्षित सीट है। 18 जनवरी को मेयर के लिए वोटिंग होनी है। 14 जनवरी से मेयर के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। आंकड़ों पर गौर करें तो भाजपा के पास कुल चार आरक्षित वर्ग के पार्षद हैं। इनमें राजेश कालिया, भरत कुमार, सतीश कैंथ और फरमिला शामिल हैं।
पहली बार राजेश बने पार्षद
राजेश कालिया पहली बार वार्ड नंबर- 6 से 2006 में पार्षद का चुनाव लड़ा था, लेकिन वह कांग्रेस के सत्य प्रकाश से हार गए थे। इस बार भाजपा की ओर से उन पर फिर से दांव लगाया गया। राजेश पहली बार वार्ड नंबर-7 से पार्षद बन गए। राजेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन के काफी करीबी माने जाते हैं। अब भाजपा उन्हें अपना मेयर उम्मीदवार बनाने जा रही है।
अतीत के दाग अच्छे हैं...
अतीत में झांकें तो राजेश कालिया पर दाग भी लगे हैं। फिलहाल, उन पर लगे सारे दाग अब धुल चुके हैं। बताया जाता है कि राजनीतिक दबाव में उन पर लगे दाग को धुल दिया गया है। मलोया थाने में उन पर बैड करेक्टर का दाग लगा था। सूत्रों की मानें तो मेयर चुनाव को लेकर ही उन्हें शुद्ध करके तैयार किया गया है।
बीजेपी ही कागज बिनने वाले को बना सकती है मेयर
राजेश कालिया का कहना है कि भाजपा एक ऐसी पार्टी है, जो किसी कागज बिनने वाले को मेयर बना सकती है। अन्य पार्टियों ने हमेशा इस तबके के लोगों की वोट लेकर केवल अपना हित ही साधा है, लेकिन अब ऐसा होने वाला नहीं है। उनका कहना है कि हमेशा भाजपा का वफादार सिपाही रहा हूं। मेयर का पद मेरे लिए पार्टी से बढ़कर नहीं है। हम एकजुट होकर भाजपा को और मजबूत करने का काम करेंगे।
भाजपा को जीत के लिए चाहिए 14 वोट
निगम में इस समय कुल 35 पार्षद हैं। इसमें 26 निर्वाचित और 9 मनोनीत हैं। जीत के लिए भाजपा को केवल 14 वोट चाहिए, जबकि भाजपा के पास सहयोगी और निर्दलीय मिलाकर 22 वोट हैं। इसमें भाजपा के 20, अकाली 1 और निर्दलीय 1 पार्षद शामिल हैं, वहीं कांग्रेस के पास केवल 4 पार्षद हैं, इसलिए भाजपा की जीत लगभग तय बताई जा रही है।
हरदीप और नेगी पर मुहर
बीजेपी सूत्रों की मानें तो डिप्टी मेयर के लिए सहयोगी शिअद के पार्षद हरदीप सिंह के नाम पर मुहर लग चुकी है। वहीं, सीनियर मेयर के लिए हीरा नेगी और सुनीता धवन में कड़ी टक्कर के बाद हीरा नेगी को प्रत्याशी बनना तय हो गया है।