अफसरों की लापरवाही व्यापारियों पर पड़ेगी भारी
प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली में निगम को 92 करोड़ राजस्व की हानि
हर पांच साल में रेंट वैल्यू के आधार पर रिवाइज होने चाहिए थे टैक्स के रेट
सोमवार को होने वाली सदन की बैठक में प्रापर्टी टैक्स के रेट बनाने पर होगी चर्चा
साल 2003 के बाद नहीं बढ़े है टैक्स के रेट, उस समय की रेंटल वैल्यू पर ही लिया जा रहा है टैक्स
आडिट विभाग नगर निगम के जवाब से संतुष्ट नहीं
राजेश ढल्ल
चंडीगढ़।
निगम अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा व्यापारियों को भुगतना पड़ सकता है। रेंट वैल्यू रिवाइज नहीं होने के कारण निगम को कामर्शियल इमारतों से आने वाले प्रापर्टी टैक्स के मद में 92 करोड़ से ज्यादा राजस्व की हानि हुई है। इसका खुलासा एजी विभाग की रिपोर्ट से हुआ है। विभाग ने सेल्फ असेसमेंट स्कीम के तहत इकट्ठे होने वाले प्रापर्टी टैक्स पर आपत्ति जताई है। सोमवार को निगम के सदन की होने वाली बैठक में वर्तमान रेंट वैल्यू के आधार पर व्यापारियों से रिवाइज रेट पर टैक्स वसूलने का प्रस्ताव लाया जा रहा है।
आडिट विभाग के अनुसार नगर निगम को चाहिए था कि हर तीन या पांच साल में प्रापर्टी टैक्स के रेट को रिवाइज करना जरूरी था। लेकिन निगम ने ऐसा नहीं किया। साल 2003 में शहर में प्रापर्टी टैक्स कामार्शियल इमारतों की रेंटल (किराए) वैल्यू के आधार पर बाजारों को अलग- अलग जोन बांट कर तय किए गए थे। आडिट विभाग के अनुसार हर साल 10 प्रतिशत किराया बढ़ता है ऐसे में 5 साल में 50 प्रतिशत किराया बढ़ गया लेकिन नगर निगम की ओर से अब तक साल 2003 में तय की गई रेंटल वैल्यू के आधार पर ही प्रापर्टी टैक्स चार्ज किया जा रहा है। आडिट विभाग के अनुसार इस समय रेंटल वैल्यू 9 से 10 गुना तक बढ़ चुकी है। 16 जून को टैक्स ब्रांच की ओर से एजी आफिस के आडिट विभाग को आपत्ति का जवाब भेजा गया लेकिन एजी आफिस इससे संतुष्ट नहीं है।
अधिकारियों को चाहिए था कि हर 5 साल बाद प्रापर्टी टैक्स का रेट रिवाइज होने के लिए सदन की बैठक में आने चाहिए थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जिस कारण नगर निगम को राजस्व हानि हुई।
शहर में हैं 50 हजार कामर्शियल
इस समय शहर में 50 हजार कामर्शियल इमारतें है। लेकिन 20 हजार व्यापारी ही टैक्स देते हैं। जिससे नगर निगम को साल की 20 करोड़ की कमाई होती है। शहर में ऐसी हजारों इमारतें, और दुकानें ऐसी है जिन्होंने साल 2003 से एक बार ही प्रापर्टी टैक्स नहीं दिया है और न ही नगर निगम ने उन्हें कोई नोटिस नहीं भेजा है। नगर निगम खुद व्यापारियों से टैक्स इकट्ठा नहीं करता है बल्कि व्यापारी खुद ही सेल्फ असेसमेंट स्कीम के तहत प्रापर्टी टैक्स जमा करवाता है।
कोट
मेयर आशा जसवाल का कहना है कि आडिट की आपत्ति और वर्तमान स्थिति को सदन की बैठक में प्रस्ताव के तौर पर रखा जा रहा है। सदन ही निर्णय लेगा। अधिकारियों से पूछा जाएगा कि हर 5 साल बाद रेट रिवाइज क्यों नहीं किए गए।
समूह सेक्टर जोन ए (प्रति स्केयर फीट) बी सी डी
1 17 20 15 13 50 रुपये प्रति माह
2 22,34,35 16 13 12 50 रुपये प्रति माह
3 7,8,9,15,19 और 26 14 12 9 50 रुपये प्रति माह
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