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कोरोना महामारी से अब तक नहीं उबरे मजदूर, आर्थिक तंगी झेलने को मजबूर

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Workers have not yet recovered from the corona epidemic, forced to face financial crisis
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पलवल। कोरोना काल में सर्वाधिक नुकसान मजदूरों का हुआ है। अब भी मजदूर आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। हालात ये हैं कि न्यूनतम वेतन पर आज भी मजदूर अब आठ की बजाय 12 घंटे नौकरी करने को मजबूर हैं। इस तरफ सरकार का कोई ध्यान नहीं है। मजदूरों को सरकार की तरफ से चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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दुनिया में एक मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है। यह दिन विशेषकर मजदूरों के लिए घोषित किया गया है, ताकि इस दिन मजदूरों की भलाई के लिए काम किए जाएं तथा उन्हें उनके अधिकारों के लिए जागरूक किया जाए। लेकिन, यहां ऐसा कुछ नहीं होता है। मजदूर दिवस के नाम पर केवल मजदूरों को बुलाकर उन्हें उनके अधिकारों के बारे में तो प्रशासन व संस्थाएं जागरूक करती हैं, लेकिन उनके हित के लिए कोई काम नहीं हो पाता है। मजदूरों को भी अब मजदूर दिवस से कोई लगाव नहीं है, क्योंकि उनके लिए तो हर दिन मजदूर दिवस ही होता है। क्योंकि, सुबह उठने के साथ ही घर चलाने के लिए मजदूरी पर जाना होता है। ऐसे में मजदूर सुबह उठकर आगरा चौक पर आकर खड़े हो जाते हैं, ताकि उन्हें मजदूरी मिल जाए और शाम को वे अपने घर जाकर बच्चों को अच्छा भोजन करा सकें और उनके तन ढकने के लिए कपड़ा ला सकें।
आगरा चौक पर काम की तलाश में खड़े रहते हैं एक हजार मजदूर
पलवल में आगरा चौक पर प्रतिदिन एक हजार के करीब मजदूर मजदूरी करने के लिए खड़े होते हैं। कई बार तो ऐसा होता है कि सुबह 10 बजे से पहले ही सभी मजदूरों को काम मिल जाता है तथा कभी-कभी ऐसा भी दिन आता है, जब घर से लाए खाने को सड़क पर बैठकर ही खाना पड़ता है और फिर वापस घर लौटना पड़ जाता है।
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कोरोना काल के बाद से मजदूर बेहद आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। पहले जो 12 हजार रुपये आठ घंटे काम करने पर मिलते थे, आज वे 12 घंटे काम करने के बाद मिलते हैं। इतना ही नहीं काफी मजदूर कोरोना काल के बाद से पूरी तरह से घर पर रोजगार के बिना बैठे हैं। आज भी मजदूरों के श्रमिक कार्ड कहां तथा कैसे बनते हैं, इस बारे में मजदूरों को जानकारी ही नहीं है।
श्रीपाल भाटी, मजदूर नेता तथा जिलाध्यक्ष सीआइटीयू
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मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करता हूं। लोगों ने काफी बताया है कि मजदूरों के कार्ड बन रहे हैं, लेकिन आज तक पूरी तरह से यह जानकारी हमें किसी ने नहीं दी है कि श्रमिक कार्ड का क्या फायदा है तथा कहां और कैसे बनता है।
- तलेबर, मजदूर
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प्रतिदिन मजदूरी करता हूं। आजतक सरकार की तरफ से कोई लाभ नहीं मिला है। कभी-कभार काम तक नहीं मिलता है। 400 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी करनी पड़ती है। मजदूरों को जो लाभ दिए जा रहे हैं, वे केवल कागजों में हैं।
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- राजीव मजदूर घुघेरा
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