पलवल(सौरभ वर्मा)। साहब हमको पता नहीं है कि रैन बसेरा कहां हैं। हम तो एक महीने से रेलवे स्टेशन पर ही सो रहे हैं। तुम पता बता दो, वहीं जाकर रुक जाएंगे। हमें किसी ने कंबल तक नहीं दिया। ठंड ज्यादा है और काम भी नहीं मिल रहा है। यही हाल रहा तो अपने घर ही लौट जाएंगे। यह कहना था रेलवे स्टेशन पर ठंड में सो रहे झांसी निवासी चंद्रभान का। वहां ऐसे करीब पांच-छह लोग जमीन पर बोरे बिछाकर सो रहे थे। यह नजारा अमर उजाला टीम ने बुधवार की रात रेलवे स्टेशन पर जाकर देखा और वहां सो रहे लोगों को रैन बसेरों के बारे में जानकारी दी।
हालांकि पलवल में तीन स्थानों पर चल रहे रैन बसेरों में से दो स्थानों पर करीब 35 लोग रात गुजारते मिले। उसके बावजूद भी शहर में ऐसे कई स्थानों पर लोग ठंड में सोते मिले, जिन्हें रैन बसेरों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
समय : रात 9 बजे
स्थान रेलवे स्टेशन
प्लेटफार्म नंबर 3 पर जीआरपी थाने के बगल में बने हॉल में करीब पांच-छह लोग सोते मिले। उन्होंने बताया कि उन्हें रैन बसेरे के बारे में जानकारी नहीं है। जीआरपी पुलिस कर्मी हो या फिर रेलवे प्रशासन, उन सोते लोगों को देखकर वहां से गुजर रहे थे, लेकिन कोई भी ठंड से बचाव के लिए मदद करने के लिए आगे नहीं बढ़ा।
समय : रात 9:30
स्थान ब्राह्मण धर्म्रशाला
ब्राह्मण धर्मशाला में बने रैन बसेरे में ताला लगा था। वापस लौट रहे धौलपुर निवासी गंगाराम ने बताया कि उन्हें यहां रैन बसेरे की जानकारी मिली थी, इसलिए यहां पहुंचे, लेकिन यहां ताला लगा हुआ है। बाद में वे एक व्यक्ति द्वारा जानकारी देने पर बस अड्डे पर बने रैन बसेरे में रात गुजारने चले गए।
समय : रात 9:45
स्थान बस अड्डा
बस अड्डे पर 4 बसों के अंदर रेडक्रास सोसाइटी द्वारा रैन बसेरे बनाए गए हैं। यहां करीब 35 लोग ठहरे हुए थे। उनके लिए बसों के अंदर ही गद्दे बिछाए हुए थे और ओढ़ने के लिए रजाइयां थीं।
समय : रात 10 बजे
स्थान जाट धर्मशाला
जाट धर्मशाला में बनाए गए रैन बसेरे में दो लोग सोते हुए मिले। यहां रेडक्रास सोसाइटी द्वारा 10 गद्दे व 10 रजाइयां रखवाई गई हैं। यहां दो लोग ही सोते मिले। उन्होंने बताया कि उन्हें इस रैने बसेरे के बारे में जानकारी थी, ऐसे में वे यहां आ गए।
वर्जन-
जिले में 6 रैन बसेरे बनाए गए हैं। इनमें पलवल में तीन स्थानों पर व होडल, हसनपुर और हथीन में एक-एक हैं। रेडक्रास टीम द्वारा दो दिन पहले सड़कों पर सोते मिले लोगों को कंबल वितरित किए गए थे। आगे भी यह कार्य जारी रहेगा। यदि कोई ठंड में सड़क, रेलवे स्टेशन या कहीं और सोता मिलेगा, तो उसे रैन बसेरों में ठहरवाया जाएगा। जगह-जगह बोर्ड भी लगाए गए हैं, ताकि लोगों को इसकी जानकारी मिले। - विकास, सचिव, जिला रेडक्रास सोसाइटी