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यहां प्रतिवर्ष जलस्तर चला जाता है दो फीट नीचे

Thu, 16 Jun 2016 04:32 PM IST
palwal
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 जिले में जलस्तर का गिरना कृषि विभाग के लिए ही नहीं जिले की जनता के लिए भी चिंता का विषय है। कृषि विभाग द्वारा जिले में लगाए गए जलश्रोत नापने के यंत्र के अनुसार प्रति वर्ष जिले का जलस्तर (चोभा) दो से तीन  फीट नीचे गिर रहा है। अगर यही हालात रहे तो एक दिन लोग बूंद-बूंद पानी को तरस जाएंगे।
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 जिले के ग्रामीण क्षेत्र में वर्ष 2000 तक जल स्तर 10 से 12 फीट पर था।  जोकि अब बढ़कर 36 फीट तक हो गया है। 15 वर्ष में इतनी तेजी से गिरता जल स्तर संदेश दे रहा है कि आने वाले समय में जमीन से पानी निकालना मुश्किल हो जाएगा। यदि विभाग ने अभी से सोचना शुरू नहीं किया तो वह दिन दूर नहीं जब पीने के पानी के लिए लोगों को दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ेगा।

कृषि विभाग हरियाणा की ओर से प्रदेश के सभी जिलों और बड़े-बड़े शहरों में भू जल स्तर को मापने के लिए जमीन में बोरिंग करके यंत्र लगाए गए हैं। जिनसे समय-समय पर पानी के गिरते श्रोत के बारे में जानकारी रिकॉर्ड की जाती है। लेकिन इसके बावजूद गिरते जल स्तर को रोकने के लिए आज तक विभाग व सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है।
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 वॉटर लेवल नापने के यंत्र के अनुसार :
वर्ष    -      पानी का लेवल
2012         28.05 फीट 
2013         30.06 फीट 
2014         32.50  फीट 
2015         34.65 फीट 
2016         36.16  फीट 
 
कैसे रुक सकता है जलश्रोत नीचे गिरने से :
-बरसात के पानी को बहने से रोकने के लिए जोहड़ों का अधिक से अधिक निर्माण कराया जाए। 
-यमुना पर जिला पलवल में बैराज बनाने की जो योजना है उस पर कार्य कर जल्द बनाया जाए। 
-बरसात का पानी जोकि सड़कों पर बह जाता है, उसे जगह-जगह जोहड़ नुमा गड्ढ़े बनाकर रोका जाए। 
 
-कृषि विभाग ने सभी जिलों में वॉटर लेवल नापने के लिए जमीन में बोरिंग करके यंत्र लगाए हैं। जिनकी रिकॉर्डिंग कंप्यूटर द्वारा समय-समय पर होती रहती है। जिले का वॉटर लेवल प्रति वर्ष दो से तीन  फीट  गिरना चिंता का विषय है। 
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-राजेंद्र कुमार, कृषि अधिकारी, पंचकूला।
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