कागजों में नियुक्त चिकित्सक निजी संस्था के लिए दे रहा सेवा
मोहम्मद शाहिद मेवाती
तावडू। सरकार वैसे तो गांवों व दूर-दूर दराज तक के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा करती है लेकिन, हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। उदाहरण के तौर पर जिले के तावडू शहर में स्थित एक स्वास्थ्य केंद्र को देखा जा सकता है जो सिर्फ कागजों पर चालू है, लेकिन पिछले करीब दस महीने से धरातल पर पूरी तरह बंद पड़ा है। स्वास्थ्य विभाग का समान व उपकरण इधर धूल फांक रहे हैं। नगर वासियों के मुताबिक यह स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही है।
जागरूक नगरवासियों का दावा है कि यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार पूरी तरह से कार्यरत हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि यहां पिछले दस महीने से कोई डॉक्टर, नर्स, या स्टाफ नजर नहीं आया है। यहां पर दो चिकित्सक नियुक्त हैं। इनमें से एक निजी संस्था को सेवाएं दे रहा है जबकि, दूसरा चिकित्सक कागजों में इस शहरी स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात है। लेकिन हकीकत में वह तावडू सीएचसी में ड्यूटी करता है। इसी तरह से अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी इधर ड्यूटी से नदारद रहते हैं। जागरूक लोगों का दावा है कि तावडू सीएचसी के एसएमओ की मिलीभगत के कारण शहरी स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात चिकित्सक ड्यूटी नहीं कर रहे हैं। इसके चलते शहरी स्वास्थ्य केंद्र का लाभ नगर वासियों को नहीं मिल पा रहा। यह मामला कई बार वार्ड पार्षद, पूर्व विधायक सहित नगर पालिका प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया। कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया लेकिन, अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्वास्थ्य केंद्र के बंद होने की वजह से मरीजों को पास के ही बड़े निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है या सीएचसी में लंबी लाइन में लगानी पड़ती है। इससे मरीजों को इलाज मिलने में देरी हो रही है। बता दें कि सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच इस स्वास्थ्य केंद्र की कहानी एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
हम लोग यहां इलाज के लिए आते हैं, लेकिन हमेशा ताला बंद मिलता है। मरीजों को दूर शहर के एकमात्र अस्पताल जाना पड़ता है या निजी क्लीनिक में जाना पड़ता है :- उजमा
यह स्वास्थ्य केंद्र उनके मकान के बिल्कुल सामने एक निजी भवन में संचालित है। उन्होंने कभी यहां पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को बैठे हुए नहीं देखा। जबकि भवन स्वास्थ्य विभाग ने किराए पर लिया हुआ है:- जान मोहम्मद।
स्वास्थ्य विभाग से ही मिली जानकारी के मुताबिक इस केंद्र के नाम पर महीने हजारों रुपये का बजट मिलता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर यह पैसा कहां जा रहा है :- रवि कुमार।
स्टाफ की कमी के चलते कुछ समय के लिए स्वास्थ्य केंद्र बंद रहा। लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं देना विभाग की पहली प्राथमिकता है। इसमें कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। यहां पर दो चिकित्सक नियुक्त हैं। एक का हाल ही में ट्रांसफर हुआ है। इसके अलावा स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की क्या लापरवाही रही है। इसकी जांच की जाएगी। - डॉ. सर्वजीत थापर, सीएमओ, मांडीखेडा