घंटों लाइन में लगने के बाद आ रहा नंबर, सितंबर में 574 करोड़ रुपये राजस्व वसूली का लक्ष्य निर्धारित
डूब क्षेत्र के निवासियों को बिजली कनेक्शन देने की प्रक्रिया हुई शुरू
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। डूब क्षेत्र के निवासियों को बिजली कनेक्शन देने की प्रक्रिया शुरू तो की गई है, लेकिन इसके लिए सिर्फ एक शिविर लगाया गया है। हजारों लोगों को कनेक्शन की आवश्यकता है। ऐसे में शिविर लगाना सिर्फ खानापूर्ति समझा जा रहा है। चोटपुर-बहलोलपुर के लोगों के लिए ही एक शिविर पर्याप्त नहीं है। तड़के कतार में लगने के बाद दोपहर तक नंबर आ रहा है।
सेक्टर-63 स्थित उपकेंद्र में लगे शिविर में चार काउंटर बनाए गए हैं। इनमें लैपटॉप लेकर बैठे कर्मचारी प्रक्रिया संचालित कर रहे हैं। अस्थायी प्रीपेड मीटर कनेक्शन लेने के लिए छिजारसी, बहलोलपुर, चोटपुर के हजारों लोग यहां जुट रहे हैं। लाइन लगने के बाद भी पहले कनेक्शन पाने की होड़ में लोग उपकेंद्र का गेट घेर रहे हैं। गेट पर चढ़कर उपकेंद्र के अंदर घुसने का भी लोगों ने प्रयास किया। स्थिति को पीएसी के जवानों ने काबू पाया। इसके बावजूद निगम शिविर की संख्या बढ़ाने पर ध्यान नहीं दे रहा। अधिकारियों का कहना है कि निगम के पास कर्मचारी कम हैं।
पर्थला इलाके में भी परेशानी
पर्थला इलाके की 10 से ज्यादा कॉलोनियों में विद्युत निगम ने कनेक्शन काटी थी। यहां पर भी बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिनको कनेक्शन की आवश्यकता है, लेकिन शिविर लगाने की योजना नहीं बनी है। इलाके के लोग जब उपकेंद्र पर कनेक्शन लेने पहुंचे तो उन्हें क्षेत्रीय उपकेंद्र पर जाकर कनेक्शन लेने का कहा गया।
नकद लाने पर ही दिया जा रहा कनेक्शन
वर्षों से डूब क्षेत्र के निवासी अस्थायी तरीके से बिजली का उपयोग कर रहे थे। अब जब कनेक्शन दिए जाने की कवायद शुरू हुई तो निगम ने सिर्फ नकद भुगतान करने वालों को कनेक्शन दिए जाने का प्रावधान रख दिया। 5355 रुपये में अस्थायी प्रीपेड कनेक्शन दिया जा रहा है। उपकेंद्र के अंदर प्रवेश लेते समय ही इसकी पुष्टि की जा रही है कि पास में नकद है या नहीं। नकद न होने पर दोबारा आने का हवाला देकर लौटा दिया जा रहा है।
कोट
शिविर की संख्या बढ़ाने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। सभी को एक काम में लगाने से अन्य कार्य प्रभावित हो जाएंगे। दो शिफ्ट में काम कराने की योजना बनाई जा रही है। सुबह 9 से दोपहर तीन बजे तक और दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक काम कराने का विचार है। - उमेश सिंह यादव, अधीक्षण अभियंता, वाणिज्यिक विद्युत निगम