गंदगी से बेजार शहर की सफाई व्यवस्था को पंख लगने की उम्मीद बन गई है। शहर के 31 में 26 वार्डों की सफाई के लिए निजी एजेंसी को कमान सौंपी गई है। पांच वार्डों की सफाई का जिम्मा नगर परिषद के पुराने कर्मचारियों के पास ही रहेगा। लेकिन कचरा निस्तारण की समस्या आगे भी बनी रह सकती है।
शहर में सफाई की समस्या बड़ी समस्याओं में शुमार है। लोगों ने भी अलग-अलग मंचों से इसके लिए आवाज को बुलंद किया है। करीब एक वर्ष से अधिक समय में जब नगर परिषद भंग रही, उस दौरान तो इस समस्या ने विकराल रूप ले लिया था। जुलाई माह में हुई नगर परिषद बोर्ड की पहली बैठक में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया था।
नगर परिषद में 31 वार्ड हैं और इन वार्डों की सफाई का बीड़ा 90 कर्मचारियों के पास था। ऐसे में सीमित संसाधनों व मैन पावर की कमी के चलते शहर में गंदगी की समस्या लगातार बढ़ती जा रही थी। नगर परिषद पहली बैठक में यह मुद्दा उठा तो गंदगी उठाने का जिम्मा निजी एजेंसी को देने का फैसला हुआ और इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे।
टेंडर प्रक्रिया के बाद एसवीएल एसोसिएट्स नामक कंपनी को काम करने की मंजूरी प्रदान कर दी गई है। इस कंपनी को 26 वार्डों की सफाई का दायित्व दिया गया है। नियम व शर्तों के अनुसार कंपनी सभी 26 वार्डों से गंदगी के ढेर को उठाएगी। इस कार्य में करीब 200 कर्मचारी सफाई करेंगे और गंदगी को उठाने के बाद गांव मेघपुर के पास डंप किया जाएगा।