धान की फसल की सरकारी खरीद शुरू होने के दावे को आधा महीना बीत चुका है, लेकिन सरकार ने एक भी दाना नहीं खरीदा है। किसानों का दर्द है कि अधिकारियों, खरीद एजेंसियों व व्यापारियों की मिलीभगत से उन्हें ठगा जा रहा है। जिसके चलते उन्हें 1510 रुपये की तय सरकारी कीमत के बदले अपनी फसल को 1200 से 1300 रुपये में बेचना पड़ रहा है।
अनाज मंडी में शनिवार को 15वें दिन भी धान की सरकारी खरीद शुरू नहीं हो पाई। हालांकि मार्केट कमेटी के अधिकारियों ने दौरा तो किया, लेकिन फसल में कमी बताकर खरीदी नहीं गई। वहीं सरकार में बैठे नेता व अधिकारी भी किसानों की हालत से लापरवाह बने हुए हैं, वे भी मात्र दौरा करने तक ही सीमित हैं।
हालांकि मंडी में धान की फसल सितंबर के अंतिम सप्ताह से ही आमद शुरू हो गई थी। प्रदेश सरकार ने एक अक्तूबर से सरकारी खरीद शुरू कराने की घोषणा की थी, व हैफेड को खरीद के लिए तय किया था, लेकिन खरीद एजेंसी के अभी तक दर्शन नहीं हुए हैं। जिसके चलते किसानों को अपनी फसल को औने-पौने दामों में व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ऐसा ही हाल हथीन की अनाज मंडी का है। वहां भी सरकारी एजेंसी ने सरकारी खरीद शुरू होने के 15 दिन बीतने के बाद तक भी एक भी दाना धान नहीं खरीदा है। स्थानीय आढ़तियों के अनुसार शनिवार को पहले दिन हैफेड के अधिकारी मंडी में आए, लेकिन बिकने के लिए आए धान में कमी बताकर वापस चले गए।
वहीं होडल, हसनपुर व खांबी की मंडियों में सरकारी खरीद तो हुई है, लेकिन यहां किसान मार्केट कमेटी के अधिकारियों पर राइस मिलर्स से मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं। शनिवार को खांबी की अनाज मंडी में किसानों का गुस्सा उभरकर सामने भी आया।