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सब्जियों पर भी दिखने लगा महंगाई की मार का असर

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होडल। सब्जियों की पैदावार में इस बार काफी कमी आई है। जिसका सीधा असर आम आदमी पर दिखता नजर आ रहा है। अगले सीजन की फसलों की बुआई का सीजन भी आ गया है। ऐसे में सब्जियों के भाव आसमान पर पहुंचने लगे हैं। जो सब्जियां दस दिन पहले तक 10 रुपये किलोग्राम तक मिल रही थी। वही अब तीन-चार गुना भाव में मिल रही हैं। इसके चलते एक ओर जहां लोगों के घर का बजट बिगड़ रहा है, वहीं सब्जी विक्रेता भी परेशान हैं।
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दुकानदार रमेश चंद, अनुराग बांगा आदि का कहना है कि बरसात के मौसम में सब्जियां जल्दी खराब हो जाती हैं। गर्मी के मौसम की शुरुआत के कारण स्थानीय क्षेत्र में उगाई जाने वाली सब्जियां खत्म हो गई है। इस समय सब्जियां दूसरे जिलों और राज्यों से मंगाई जा रही हैं। ऐसे में इनके दाम काफी बढ़े हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में सब्जी मंडी से सब्जी ले जाकर बिक्री करने वाले हॉकरों ने मंडी से बिक्री के लिए सब्जी ले जाना भी बंद कर दिया है। हॉकर रामसिंह ने बताया कि मंडी से खरीदकर बिक्री करना बहुत मुश्किल हो गया है। सब्जियां महंगी होने से खर्च भी नहीं निकल पा रहा है।
ये हैं सब्जियों के दाम
मंडियों में जहां टमाटर पहले 10 रुपये किलो में बिक रहा था, वहीं आज 50 रुपये किलो बिक रहा है। इसी तरह खीरा 30 रुपये से बढ़कर 40 रुपये, आलू 10 की जगह 20 रुपये, प्याज 20 रुपये से बढ़कर 30 रुपये, नीबू 30 से 60 रुपये, घीया 20 से 40 रुपये, अरबी 30 से बढ़कर 50 रुपये, टिंडा 20 से 60 रुपये किलो हो गया है। वहीं बैंगन 15 रुपये से बढ़कर 30 रुपये, भिंडी 20 से 60 रुपये, करेला 20 से बढ़कर 30 रुपये, गोभी 10 से बढ़कर 40 रुपये हो गया है।
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वर्जन-
सब्जी लगातार महंगी हो रही है। जिस कारण अब केवल कुछ चुनिंदा सब्जियों को छोड़कर लोग अन्य सब्जियों को लेने से बच रहे हैं। सरकार को इस पर नियंत्रण करना चाहिए। - गुलशन राय गोयल, शिक्षाविद
सब्जी इतनी महंगी हो रही है कि आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई है। सरकार को सब्जी की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण करने पर ध्यान देना चाहिए। - महेंद्र प्रसाद सिंगला, अध्यक्ष लायंस क्लब डायमंडल
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