टीनशेड पर आढ़तियों का कब्जा, खुले में भीगता रहा किसान का आनाज
बारिश में भीगने के कारण 1000 से लेकर 1300 रुपये प्रति क्विंटल तक सस्ता बिका धान
दिनेश देशवाल
नूंह। जिले में सोमवार को हुई बारिश ने किसानों के माथे पर शिकन पैदा कर दी। इन दिनों बाजरा, धान, कपास, ज्वार, ढेंचा आदि की फसल पककर तैयार है और उसकी कटाई का काम चल रहा है। धान व बाजरे की पैदावार मंड़ियों में बड़े पैमाने पर आ रही है। सोमवार को आई बारिश से किसानों की फसल भीग गई, जिसे खरीद एजेंसियों ने मनमाने भाव से खरीदा। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। खेतों में कटी पड़ी धान की फसल के काले पड़ने का डर भी किसानों को सता रहा है।
बता दें कि इन दिनों फसल कटाई का सीजन चल रहा है। सरसों की बिजाई की तैयारियों में भी किसान लगे हुए है। जिले में इस बार हुए जलभराव से अगली फसल की बिजाई पर जो संकट था, वह इस बारिश से और गहरा गया है। खेतों में अभी भी पानी खड़ा हु़आ है। किसान बुधराम आलदोका, सतबीर, किशोरी, जैकम, दीन मोहम्मद, हारुण, सद्दीक आदि ने बताया कि बारिश से उनकी धान और बाजरे की फसलें पहले ही खराब हो चुकी थी। अब खरीद के समय एजेंसियां भी नमी का बहाना बनाकर रेट घटा रही हैं। सोमवार को धान की फसल बारिश में भीग गई। खरीदारों ने 3000 रुपये से अधिक भाव की धान की फसल को 1700 रुपये में खरीदा। इससे उन्हें प्रति क्विंटल के भाव में 1000 से 1300 रुपये तक की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में लागत भी पूरी करना मुश्किल हो गया है।
नमी के नाम पर हो रही मनमानी
एक किसान ने बताया कि हमारी फसल में मेहनत और लागत दोनों लगी है, लेकिन मंडी में सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। सरकारी एजेंसियां अपनी मनमर्जी चला रही हैं और हमारी फसल को नमी बताकर सस्ते दामों पर खरीद रही हैं। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। किसानों का कहना है कि नमी के नाम पर की जा रही मनमानी पर रोक लगनी चाहिए और जो नुकसान हुआ है उसका उचित मुआवजा सरकार को देना चाहिए।
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नूंह की अनाजमंडी में मैं धान लेकर सुबह करीब छह बजे आ गया था लेकिन बोली नहीं लगी। दोपहर में आई बारिश में फसल भीग गई। इससे खरीदारों ने 1700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में खरीदा है जबकि धान 3000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक में बिक रहा है।- समून खान, ढकलपुर, पुनहाना
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आढ़ती के पास लाकर फसल डाली तो बारिश आ गई। उनके पास ढकने के लिए साधन नहीं था और न ही आढ़ती ने उन्हें कोई तिरपाल आदि दिया। मंडी की टीन शेड में आढ़तियों ने अपनी बोरियां लगाई हुई हैं। किसान के पास टीन के नीचे फसल खाली करने का विकल्प ही नहीं है।
- मोहम्मद उस्मान, किसान
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टीन शेड पर आढ़तियों का कब्जा: खरीद एजेंसी और आढ़तियों ने फसल खरीदकर उसकी बोरियां टीनशेड के नीचे लगाई हुई है। जिसके कारण किसान को उन टीनशेड का कोई लाभ नहीं हो रहा है। किसान को खुले में अपनी फसल खाली करनी पड़ती है, सोमवार की तरह मौसम खराब होने से भीगी फसल का खामियाजा किसान को भुगतना पड़ता है, जबकि ये टीन शेड किसानों की सुविधा के लिए बनाई होती है।
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आढ़तियों से किसानों को तिरपाल आदि उपलब्ध कराने के लिए कह दिया था। ज्यादा फसल बारिश होने से पहले बोली लगकर बिक चुकी है। यदि किसी खरीदार ने सस्ते दाम में किसान की फसल को खरीदा है तो वह गलत है। टीन शेड में लगे हुए आढ़तियों व एजेंसियों के माल को उठवाने के निर्देश दिए गए हैं। अचानक से मौसम खराब होने के कारण समस्या हुई है।
-मनोज कुमार, सचिव, मार्केट कमेटी नूंह