13 घरों में घुसा पानी, कई मकान हुए क्षतिग्रस्त, जल निकासी न होने से बाढ़ जैसे हालात
ग्रामीणों की जिंदगी दांव पर, बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की सेहत पर संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। रनियाला खुर्द गांव में मेघ अब राहत नहीं आफत बनकर बरस रहे हैं। तीन दिन की लगातार बारिश के बाद गांव का निचला इलाका जलमग्न हो गया है। 13 घरों में पानी घुस गया। इससे दर्जनों परिवारों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कई घरों की दीवारें ढह चुकी हैं और वहीं कुछ मकानों में दरारें पड़ने से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
गांव की गलियों में तीन-तीन फीट तक पानी जमा है। बच्चें स्कूल तो बुजुर्गों को इलाज के लिए नहीं ले जा पा रहे हैं। लोगों की रोजी-रोटी पर भी संकट बन गया है। लोगों का आरोप है कि यह जलभराव नहीं सरकारी तंत्र और प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है, जिसका खामियाजा गांव के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। गांव के पूर्व सरपंच अब्दुल रजाक ने बताया कि 15 दिन पहले ही खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी को पानी भरने की चेतावनी दी गई थी लेकिन न तो नालों की सफाई हुई, न कोई पुख्ता इंतजाम। अब्दुल करीम, इमरान, नसीबन, शौकत, कासिम, मुबिन, साहबू, इस्लाम जैसे परिवारों के घरों में पानी घुस गया है। दीवारें गिर रही हैं, बिजली की तारे भीगी हैं, जिससे करंट लगने का खतरा बढ़ गया है।
लोगों ने कहा- सिर्फ दिखावे के इंतजाम
ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ दिखावे के इंतजाम किए गए हैं, हमें दिखावे के नहीं, स्थायी समाधान चाहिए। प्रशासन को यह समझना होगा कि यह केवल ग्रामीण समस्या नहीं, बल्कि एक मानवीय संकट है। ग्राम सचिव सुरेंद्र सिंह ने माना कि नालों की सफाई न होना एक बड़ी चूक थी। अब युद्धस्तर पर पानी निकासी की कोशिश की जा रही है। लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि जिनके घरों को नुकसान हुआ है, उन्हें तुरंत मुआवजा दिया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति न आए, इसके लिए ठोस योजना बने।
मंगलवार को एसडीएम ने लिया था हालात का जायजा
एसडीएम गुरमीत सिंह ने मंगलवार को गांव रनियाला खुर्द पहुंचकर जलभराव की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर पंचायत प्रतिनिधियों से बातचीत कर तुरंत जल निकासी के निर्देश दिए। एसडीएम ने कहा कि हालात गंभीर हैं और प्रशासन की ओर से जल्द राहत कार्य शुरू करवाया जाएगा।