प्रशासन के नोटिस ने उड़ाई किसानों की नींद
होडल। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए जिला उपायुक्त के निर्देश पर एसडीएम द्वारा धान की फसल के अवशेष जलाने के मामले में किसानों को नोटिस भेजे गए हैं। नोटिस से किसानों की नींद उड़ी हुई है। किसान अधिवक्ताओं के पास चक्कर काटते नजर आ रहे हैं। इस मामले में भिडूकी, खिरबी व बांसवा के कई किसानों ने एसडीएम संदीप अग्रवाल को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई। इस पर एसडीएम ने किसानों से फसल के अवशेष नहीं जलाने को कहा, साथ ही नोटिस के मामले में मदद का आश्वासन दिया। इसके बाद भी किसानों को चिंता सता रही है कि कहीं उन्हें अदालत के चक्कर न काटने पड़ जाएं।
उपमंडल अधिकारी की ओर से धारा 107/150 के तहत क्षेत्र के करीब 180 किसानों को नोटिस जारी किए गए हैं। डॉ. सतीश कुमार, हरेराम, लालचंद, रघुवीर सिंह, नन्नू सिंह, रामकिशन, हेतराम, जय सिंह, भोजराज आदि किसानों का कहना है खेतों में फसल खड़ी है और प्रशासन द्वारा पराली जलाने के नोटिस भेजे जा रहे हैं। पता नहीं कौन से साल में पराली जलाई थी। किसानों का कहना है कि वह बाजरा, धान और गेहूं की खेती कर अपने बच्चों का पेट पाल रहे हैं। वर्तमान में भी खेतों में फसल पककर तैयार खड़ी है। फसल बिक्री के लिए किसान पहले से ही चिंता में डूबा हुआ है, वहीं प्रशासन के नोटिस ने नींद उड़ा दी है।
भरना होगा बांड
एसडीएम संदीप अग्रवाल ने बताया कि कृषि विभाग से उनके कार्यालय को एक सूची प्राप्त हुई है। जिसमें वर्षों पहले जिन किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ या जुर्माना लगा था, उनका डाटा है। उस डाटा के आधार पर ही करीब 180 किसानों को उप मंडल कार्यालय से नोटिस भेजा गया है। जिन किसानों को नोटिस मिले है, उन्हें एक बांड भरना होगा कि वह इस वर्ष पराली नहीं जलाएंगे। किसान अपने आईडी प्रूफ के साथ कार्यालय पहुंचकर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि खेतों में फसल के अवशेष जलाने पर पूरी तरह से पाबंदी है।