- 10 हजार रुपये का जुर्माना, पीड़ित बच्ची को सरकार देगी साढ़े 10 लाख रुपये का मुआवजा
- अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत राणा ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में की मामले की सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। रिश्तों को तार-तार कर 11 वर्षीय बेटी से दुष्कर्म करने वाले सौतेले पिता को अदालत ने दोषी करार दिया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत राणा ने मामले की सुनवाई करते दोषी जैकम को मरते दम तक कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इसके अलावा पीड़ित बच्ची को सरकार की तरफ से साढ़े 10 लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला सुनाया गया। मामला साल 2021 में होडल थाना अंतर्गत एक कॉलोनी का है। मामले की पैरवी कर रहे सरकारी वकील हरकेश की दलीलों को सुनकर न्यायाधीश ने यह फैसला सुनाया है।
दरअसल, सितंबर 2021 में यूपी के मथुरा जिले के एक गांव निवासी एक 11 साल बच्ची ने होडल थाना पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि पिता की मौत के बाद उसकी मां ने दूसरे व्यक्ति से शादी कर ली। शादी के बाद वह उन्हें लेकर होडल स्थित एक कॉलोनी में किराये के मकान में रहने लगा। 10 सितंबर को उसकी मां, अपनी मां से मिलने के लिए मायके गई थी। घर पर वह अपने छोटे भाई व सौतेले पिता के साथ सो रही थी। आधी रात को सौतेले पिता ने उससे दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। सुबह बच्ची की तबीयत खराब होने पर उसने यह बात पड़ोस में रहने वाली अपनी सहेली को बताई। सहेली के परिजनों की मदद से वह पुलिस थाने पहुंची और आरोपी पिता के खिलाफ शिकायत दी। पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ थाने में एफआईआर नंबर 335 दर्ज की और हसनपुर चौक से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराकर सबूत एकत्रित किए। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत राणा की अदालत ने बुधवार को सरकारी वकील हरकेश तथा वकील राजेंद्र खत्री की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुनाया। फैसले में आरोपी जैकम को दोषी करार देते हुए मरते दम तक कारावास व 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। पीड़ित पक्ष की तरफ से वकील राजेंद्र खत्री ने केस की पैरवी की।
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पीड़िता को साढ़े 10 लाख रुपये मुआवजा मिलेगा
न्यायाधीश प्रशांत राणा ने कहा कि सौतेले पिता द्वारा बच्ची के साथ किया गया कृत्य मानवता को शर्मसार करने वाला है, जिसकी क्षतिपूर्ति नहीं की जा सकती है। बच्ची के साथ हुए दुर्व्यवहार का अंदाजा लगाना मुश्किल है। दोषी के कुकृत्य की इससे कम सजा नहीं हो सकती। उन्होंने फैसला सुनाते हुए कहा कि पीड़िता को सरकार द्वारा साढ़े 10 लाख रुपये मुआवजा राशि दी जाए, जिससे भविष्य में वह अपना जीवन सुगम तरीके से जी सके।
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