‘बिजली निगम कर्मचारियों को समान वेतन दे सरकार’
पलवल। बिजली निगमों में ठेका प्रथा खत्म कराने, पुरानी पेंशन बहाल कराने व सातवें वेतन आयोग के अनुरूप मकान किराया भत्ता जनवरी 2016 से लागू कराने की मांग पर शुक्रवार को यहां जाट धर्मशाला में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में पलवल व होडल डिवीजन के बिजली कर्मचारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर कर्मचारियों ने सरकार की ठेका प्रथा, आउटसोर्स और निजीकरण की नीतियों का विरोध करते हुए इसे भ्रष्टाचार बढ़ने का कदम बताया। उन्होंने मांग की कि बिजली निगमों में कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को प्रदेश स्तर पर अलग-2 वेतन देने की बजाय एक ही वेतन निर्धारित किया जाए तथा सेवा सुरक्षा की गारंटी देते हुए सम्मानजनक वेतन निर्धारित किया जाए।
संघ के प्रदेश महासचिव सुभाष लांबा व यूनियन के उपमहासचिव रमेश चंद ने बताया कि बिजली निगमों में सरकार की आउटसोर्स पॉलिसी की पूरी तरह से अवहेलना की जा रही है। सरकार की वर्ष 2015 की पॉलिसी के तहत पार्ट-2 में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच में ठेकेदार नहीं होगा। बिजली कर्मचारी भारी जोखिम का कार्य करते हैं, यही कारण है कि लाइनों पर काम करते समय हजारों बिजली कर्मचारियों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद सरकार ने बिजली कर्मचारियों के जोखिम भत्ते की मांग को अनसुना कर रखा है।
उन्होंने कहा कि बिजली निगमों में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं देने में परेशानी पैदा हो रही है। आज बिजली निगमों में वर्क लोड के मुताबिक 70 हजार से ज्यादा बिजली कर्मचारियों की जरूरत है, लेकिन मात्र 30 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। यूनियन नेताओं ने सरकार से 2014 में घोषणा पत्र में किए वादों को पूरा करने की मांग की। उन्होंने बताया कि 16-18 अगस्त को पंचकूला में आयोजित सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रांतीय प्रतिनिधि सम्मेलन में उपरोक्त तमाम मांग व मुद्दों पर चर्चा के बाद आंदोलन की घोषणा की जाएगी।
सर्कल सचिव जितेंद्र तेवतिया की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन का संचालन राजकुमार डागर ने किया। सम्मेलन में यूनिट प्रधान राजेश शर्मा, उदयवीर सोरौत, सचिव वेद तेवतिया, हरि सिंह, प्रेम सहरावत, दीना बत्रा, अनिल कुमार, नेमचंद रावत, दीपक शर्मा, रण सिंह, सतबीर, भगवान सिंह, पवन शर्मा, मेवाराम, जसबीर व सोनू ने अपने विचार व्यक्त किए।