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उपायुक्त ने किया सौंदहद गांव के सरपंच को बर्खास्त

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होडल। फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर गांव सौंदहद के सरपंच बने रामजीत को उपायुक्त नरेश नरवाल ने बर्खास्त कर दिया है। उपायुक्त ने पंचायती राज एक्ट 1994 की धारा 177 के तहत सरपंच पद को रिक्त घोषित करते हुए बहुमत वाले पंच को तुरंत प्रभार देने का आदेश जारी किया है।
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जिला उपायुक्त नरेश नरवाल ने जारी किए हुए अपने आदेश में कहा कि गांव निवासी प्रहलाद सिंह ने 20 मार्च 2018 को दी शिकायत में बताया कि होडल थाना पुलिस द्वारा गांव के सरपंच रामजीत के खिलाफ दर्ज फर्जी सर्टिफिकेट के मामले में 9 अप्रैल 2016 को आरोप सिद्ध हो चुके हैं, अब रामजीत को सरपंच रहने का कोई हक नहीं है। शिकायत के आधार पर तत्कालीन उपायुक्त ने सरपंच को नोटिस जारी किया था। उपायुक्त के नोटिस की परवाह नहीं करते हुए सरपंच ने नोटिस के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। जिसे माननीय उच्च न्यायालय ने 11 मार्च 2019 को खारिज करते हुए कहा कि सरपंच द्वारा दिया गया सर्टिफिकेट पूरी तरह से फर्जी है। उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद सर्वोच्च न्यायालय में एक अपील की गई। जिसको सर्वोच्च न्यायालय ने 1 जुलाई 2019 को अपने आदेश जारी करते हुए शिकायत को सही मानते हुए होडल उपमंडल सब न्यायालय को जल्द फैसला करने आदेश भी दिए। जिला उपायुक्त के आदेश में बताया गया कि होडल उपमंडल सब न्यायालय ने 18 दिसंबर 2019 को अपना फैसला देते हुए पद मुक्त सरपंच रामजीत द्वारा दिए गए सर्टिफिकेट को फर्जी करार दे दिया। जिला उपायुक्त ने पंचायत एक्ट 1994 की धारा 175 (1) के तहत आदेश जारी करते हुए 3 फरवरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जिस पर जवाब भेजने के बाद उपायुक्त ने 28 फरवरी को पद मुक्त सरपंच से मौखिक सवाल करने के बाद पंचायतीराज एक्ट 1994 की धारा 51(3) के तहत प्राप्त शक्तियों के तहत सरपंच रामजीत को बर्खास्त कर बहुमत वाले पंच को चार्ज देने के आदेश जारी किए हैं।
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