पलवल। नए कृषि कानूनों की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी कानून की मांग के संबंध में अटोहां चौक पर किसानों का धरना बुधवार को भी जारी रहा। इस दौरान सहरावत पाल के किसानों ने धरने को समर्थन दिया। किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरनास्थल पर गायकों ने भजनों के माध्यम से समा बांध दिया और सरकार पर कटाक्ष कर कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत ने बताया कि 26 अगस्त को आंदोलन को नौ माह पूरे हो जाएंगे। इस दिन दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक होगी तथा आंदोलन की आगे की रणनीति बनाई जाएगी। इसमें पलवल से भी किसान हिस्सा लेने जाएंगे। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार कृषि कानूनों को वापस ले। कानून वापस नहीं होने तक कोई भी किसान घर नहीं लौटेगा। केंद्र सरकार किसानों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। किसान अब किसी दबाव में आने वाले नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। किसानों का कहना था कि सरकार जिस तरह से किसान, मजदूर व आम वर्ग का शोषण कर रही है, लोग इसका हिसाब चुनावों में लेंगे। किसानों ने कहा कि आज हर चीज महंगी होती जा रही है, लेकिन फसल का मूल्य वहीं पर है। सरकार किसानों की आय दोगुना करने की बात कहकर कृषि कानूनों को लादना चाहती है। इससे उद्योगपतियों को फायदा होगा। धरने की अध्यक्षता नंदराम सरपंच बजादा पहाड़ी ने की और संचालन नरेंद्र सहरावत ने किया। गहलब, कलसाड़ा, भमरौला जोगी और पहरा के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से धरनास्थल पर पहुंचे। धरने को रघुवीर सिंह, रूपराम तेवतिया, सोहन पाल, जगन नाथ सिंह डागर, अशोक तिवारी, रणवीर चौहान, देवी सिंह तेवतिया, उदयवीर सरपंच, किशन सिंह मध्य प्रदेश, बीर सिंह चौहान तथा टेकचंद जनौली व जयदेव चौहान ने संबोधित किया।