शिकारियों के कहर वन्य जीव जंतुओं का अस्तिव खतरे में पड़ गया है। शिकारी नील गायों व राष्ट्रपक्षी मोर को भी अपना निशाना बना रहे है। विडंबना तो यह है कि सरकार ने भी वन्य जीव जंतुओं की सुरक्षा के लिए कोई योजना तैयार नहीं की है।
फरीदाबाद व पलवल दोनों जिलों में वाइल्ड लाइफ विभाग में मात्र एक इंस्पेक्टर व सब इंस्पेक्टर तैनात हैं और वे भी कुछ माह में सेवानिवृत होने वाले है। अब ऐसे में वन्य जीव जंतुओं की सुरक्षा रामभरोस है।
हथियार व वाहनों से लैस रहते है शिकारी
मेवात क्षेत्र के कुछ गिरोह जिले में काफी समय से सक्रिय दिखाई देने लगे है। उनके साथ स्थानिय कुछ लोग भी मिले हुए होते है, जो उनका यहां साथ देते है और शिकार करवाते है। शिकार जीप, टाटा-407 व मैक्स आदि वाहनों में हथियारों से लैस होकर आते है और जिले के ग्रामीण क्षेत्र के जंगलों में शिकार कर शिकार को अपने वाहन में डालकर आसानी लेकर वापिस निकल जाते है। ऐसे शिकारियों को आगरा नहर के किनारे, भूडेर के जगंलों में लोगों ने कई बार देखा है और इसकी शिकायत भी वन्य प्राणी विभाग से की है, लेकिन इन पर कोई रोक लगाने वाला नहीं है।
मांस व खाल के लिए करते है शिकार
शिकारी गाय, नील गाय व हिरन का शिकार करने के बाद इनके मांस को दिल्ली व अन्य बड़े शहरों के बाजार में मंहगे दामों पर बेचे देते है और खाल व सींगों की तस्करी करते है।
आए दिन सामने आ रहे है हत्या के मामले
गत दिनों पलवल शहर की सिविल लाइन कॉलोनी में एक हिरन को लोगों ने शिकारियों से बचाया था और ऐसा ही एक मामला खांबी गांव के समीप बारहसिंगा के शिकार का मामला प्रकाश में आया था। नील गायों की हत्या के तो पिछले एक वर्ष में दर्जनों मामले सामने आ चुके है। चांदहट, सदर व हथीन थाने में मोरों की हत्या के मामलों के अलावा अभी नील गाय की गोली मारकर हत्या करने का मामला सामने आया था।
उच्चाधिकारियों को कई पत्र: डेलचंद
वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर डेलचंद ने बताया कि एक जिले में कम से कम सात कर्मचारियों का स्टाफ होना आवश्यक है और उनके पास हथियार व वाहन का होना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा केवल उन्हें बाइक दी गई हैं, इसके बावजूद भी वे हर स्थान पर पहुंचने का हर संभव प्रयास करते है। उन्होंने बताया की स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए उन्होंने विभाग के उच्चाधिकारियों को दर्जनों बार पत्र भेज है, लेकिन आज तक कोई कर्मचारी तैनात नहीं हो सका है।