संवाद न्यूज एजेंसी
होडल। शहर में बृहस्पतिवार दोपहर बाद हुई बरसात का पानी अभी निकल भी नहीं सका था कि शुक्रवार की सुबह से हुई झमाझम बरसात के बाद पूरा शहर फिर से जलमग्न हो गया। होडल में साल में अब तक सबसे ज्यादा रिकॉर्ड 76 एमएमबारिश हुई। जिसके कारण बाजार में जहां दुकानों में पानी प्रवेश कर गया तो वहीं काॅलोनियों में मकानों में पानी घुस गया। जलभराव से परेशान लोगों ने कहा कि नगर परिषद केवल कागजों में ही करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराने के दावे करती है, लेकिन पिछले कई वर्षों से पानी निकासी की ठोस व्यवस्था नहीं कर सकी है। हालांकि फसलों के लिए एक बरसात फायदेमंद साबित हुई।
बारिश के कारण शहर की विभिन्न पट्टियों, काॅलोनियों व सड़क पर बरसाती पानी भर गया, जो 24 घंटे बीतने के बाद भी नहीं निकल सका। प्रशासन के पानी निकासी के सभी दावे पूरी तरह से धराशायी हो गए। बरसात के कारण गांधी चौक, नगर परिषद कार्यालय, अनाज मंडी, सब्जी मंडी सहित अन्य बाजारों में भी पानी भर गया, जो घंटों तक नहीं निकला। दुकानों में पानी भरने के बाद भी दुकानदार पानी निकासी के इंतजाम में जुट गए। दुकानदारों का कहना था कि नगर परिषद द्वारा शहर में पानी निकासी के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये बेकार साबित हो रहे हैं। करोड़ों खर्च के बाद भी समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। शहर के अधिकांश रास्तों में बरसाती पानी भरनेे के कारण लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
शहर निवासी राजू, मोनू, कैलाश, सतीश कुमार, आरडब्ल्यूए के प्रधान रमनलाल पंखीया, सौरभ, उदयभान का कहना था कि नगर परिषद द्वारा शहर में पानी निकासी पर करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन बारिश होते ही परिषद के दावों की हवा निकाल जाती है। सड़कों पर भरे पानी से निकलते समय दुपहिया वाहन सवार कई महिला-पुरुष दुर्घटना का शिकार हो गए। इसके अलावा बस स्टैंड, पुन्हाना चौक, अग्रसेन चौक, न्यू अनाज मंडी, ताली मंडी, खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय के बाहर, गढिय़ा बाजार, गांधी चौक, सर्राफा बाजार, अग्रवाल कॉलोनी, नंगला रोड, गढिय़ा मोहल्ला, गढ़ी चौक, पुरानी जीटी रोड के अलावा अन्य सड़क मार्ग पर घंटों पानी भरा रहा।
धान की रोपाई के लिए उपयुक्त बारिश
कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक ने बताया कि होडल में रिकॉर्ड 76 एमएम बारिश हुई है, जबकि हसनपुर में 16, बहीन में 10, पलवल में नौ तथा हथीन में छह एमएम बारिश हुई है। फसलों की दृष्टि से यह बारिश फायदेमंद साबित हुई है। इस बारिश से ज्वार, बाजरा, कपास, गन्ना फायदा हुआ है। इस बारिश के बाद किसान धान की रोपाई भी कर सकते हैं। इससे मूंगफली, तिल, उदड़, सोयाबीन, ग्वार व लोबिया की बिजाई भी की जा सकती है।