संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। गांव खिल्लूका में जन स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत दो कर्मचारी बिना कोई काम किए छह वर्षों से सरकारी खजाना से वेतन लेते रहे। शिकायत हुई तो जांच के बाद कर्मचारियों को हटाकर उनसे वेतन के रूप ली गई धनराशि की रिकवरी के आदेश जारी किए गए हैं। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र कुमार ने दोनों कर्मचारियों अकबर एवं जमील ने जो वेतन लिया है, उसकी रिकवरी के लिए खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारी को पत्र लिखा है। जानकारी के अनुसार शिकायत मिलने पर जिला स्तर के अधिकारियों ने टीम बनाई और खिल्लूका गांव में जाकर जांच की। जांच के दौरान पाया गया कि दोनों कर्मचारी कोई काम नहीं कर रहे थे। इन दोनों की ड्यूटी जिन नलकूपों पर लगाई गई थी। वे नलकूप आठ वर्षों से बन्द हैं। कोई कार्यस्थल नहीं है। इसके बावजूद इसकी सूचना जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों को नहीं दी। दोनों जलकर्मी बिना कोई काम किए हथीन खण्ड कार्यालय से दस हजार रुपये से अधिक वेतन लगातार लेते रहे। किसी भी अधिकारी ने उनके कामकाज के बारे में कोई पूछताछ तक नहीं की। बिना काम किए वेतन लेने के इस मामले का पर्दाफाश उस समय हुआ। जब नई ग्राम पंचायत में सचिव सुरेंद्र सिंह ने कार्यभार संभाला। उन्होंने स्टाफ के जल कर्मी अकबर एवं जमील के काम के बारे में पता किया। ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा की बैठक बुलाई गई, जिसमें उपस्थित लोगों ने साफ कर दिया कि अब गांव में कोई ऐसा नलकूप अथवा कार्यस्थल नहीं है, जहां वे ड्यूटी देते हों। बिना काम किए इन लोगों ने वेतन लिया है। गांव के निवासी एवं जन जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नाजिम खिल्लुका ने बताया कि इस मामले में वेतन निकालने वाले जन स्वास्थ्य विभाग के जूनियर इंजीनियरों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। काम न होने पर इन दोनों कर्मियों की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को क्यों नहीं दी गई। इस बारे में ग्राम सचिव सुरेंद्र सिंह ने बताया कि रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।