फोटो कैप्शन28पीएएलपी4- अस्पताल में मरीजों की आंखों की जांच करते हुए चिकित्सक।
28पीएएलपी5- आंखों के कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़।
28पीएएलपी6- डॉ.गौरव भाटी, नेत्र रोग विशेषज्ञ
बच्चे, युवा व बुजुर्ग सभी इस बीमारी से परेशान, फ्लू से बचने के लिए सफाई का रखें विशेष ध्यान
स्वास्थ्य विभाग दे रहा सावधानी बरतने की सलाह, गांवों में लगाए जा रहे नेत्र रोग जांच शिविर
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। आई फ्लू बीमारी ने जिले को तेजी से अपनी चपेट में ले लिया है। बच्चे, युवा व बुजुर्ग सभी आई फ्लू से पीड़ित हैं। जिले में शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा, जिसका कोई न कोई सदस्य आई फ्लू से ग्रस्त नहीं है। आखों में सूजन, जलन व खुजली से परेशान बच्चों को स्कूल नहीं भेजा जा रहा है। नौकरीपेशा लोगों ने भी अपने काम से छुट्टी ले ली है। आई फ्लू के तेजी से फैलने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले जिला नागरिक अस्पताल में आई फ्लू से पीड़ित से 350 से 400 मरीज रोजाना इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं पहले यह संख्या 50 से 100 रहती थी। इसके अलावा निजी अस्पतालों में मरीजों की भरमार है। नेत्र रोग विशेषज्ञों के पास मरीजों की लाइन लगी हुई है।
बाढ़ग्रस्त गांवों से शुरू हुई आई फ्लू बीमारी ने आज पूरे जिले में पैर पसार लिए हैं। चिकित्सीय भाषा में इसे कंजक्टिवाइटिस कहते हैं। आंखों की निचली व ऊपरी पलकों की बाहरी परत को कंजेक्टिवा कहते हैं, इसमें वायरल, बैक्टीरियल व एलर्जिक संक्रमण कंजक्टिवाइटिस कहलाता है। इसमें आंखें लाल हो जाती हैं तथा जलन होती है। आंखों से चिपचिपे द्रव्य का निकलना व आईलैश जुड़ने को एलर्जिक संक्रमण माना जाता है। आंख का सफेद हिस्सा पूरी तरह से लाल हो जाता है। इस अवस्था में काफी ध्यान देने और विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराने की जरूरत होती है। इस स्थिति में रोगी को आंखों में बहुत दर्द होता है और बेचैनी व चुभन महसूस होती है। नींद से उठने पर दोनों पलकों का आपस में चिपक जाना, सिर दर्द होना, आंखों में बार-बार कीच आना, पलकों पर अधिक सूजन होना, आंखों में लाली, रोशनी सहन न कर पाना इसके मुख्य लक्षण हैं। इसकी शुरुआत खुजली से होती है। यह छूने से फैलने वाला रोग है।
अस्पतालों में लगी आई फ्लू के मरीजों की भीड़
पूरे जिले में आई फ्लू से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्पताल में बीमारी से पीड़ित मरीजों की भीड़ लगी रहती है। आंखों पर चश्मा लगाए लोग अपनी बारी आने के इंतजार में बैठे रहते हैं। फ्लू की तेजी को देखते हुए अस्पताल में पांच चिकित्सक मरीजोंं की जांच कर उन्हें दवाइयां दे रहे हैं। दवाईयों का टोटा होने के बावजूद भी अस्पताल में आई ड्रॉप की आपूर्ति सुचारु रूप से की जा रही है। इसके अलावा गांवों में भी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से नेत्र जांच शिविर लगाकर मरीजों को दवाइयां दी जा रही हैं।
हवा में नमी व उमस के कारण आई फ्लू रोग फैलता है। यह एक दूसरे के संपर्क में आने से तथा कपड़ों को इस्तेमाल करने से भी फैलता है। इससे बचाव के लिए सफाई रखना बेहद आवश्यक है। दिन में कम से कम दो बार आंखों को जरूर धोएं। अपनी तौलिया व कपड़े का प्रयोग किसी को न करने दें। आंखों को धोने के बाद रगड़े नहीं। पीड़ित व्यक्ति घर से बाहर कम से कम निकलें। चिकित्सक से सलाह लें और उनके द्वारा बताई गई दवाई को बार-बार आंखों में डालें। उक्त सावधानी बरतने पर तीन से पांच दिन में फ्लू ठीक हो जाएगा। - डॉ. गौरव भाटी, नेत्र रोग विशेषज्ञ