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जमीनों की रजिस्ट्रियों पर रोक लगाते ही सामने आने लोग

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जमीनों की रजिस्ट्रियों पर रोक लगाते ही सामने आने लोग
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पलवल। प्रदेश सरकार द्वारा जमीनों के मामले में हो रहे घोटालों को देखते हुए तहसीलों में रजिस्ट्रियों पर 17 अगस्त तक रोक लगाने का असर पहले ही दिन दिखाई देने लगा है। सरकार के आदेशों के आते ही जिले के लोगों ने पलवल के तहसीलदार के खिलाफ सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज करा फर्जी तरीके से रजिस्ट्रियां कर करोड़ों रुपये हड़पने का आरोप लगाया है। बृहस्पतिवार को तहसीलदार में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए राष्ट्रवादी विचार मंच के संयोजक स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने सीएम विंडो पर शिकायत दी है। शिकायत में पलवल में हुए रजिस्ट्री घोटाला की ओर मुख्यमंत्री को ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है। शिकायत में उन्होंने कहा कि तहसील कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार चरम सीमा को पार कर चुका है। आम आदमी का काम बिना रिश्वत लिए नहीं होते।
सीएम विंडो पर दी गई शिकायत में स्वामी ने कहा है कि अवैध कॉलोनियों में भी रजिस्ट्री की गई। वसीका न.18 अगवानपुर, वसीका न.359 किठवाडी, वसीका न. 2156 भाटिया कॉलोनी, वसीका न. 2317, 2379, 2323 की रजिस्ट्री 14 जुलाई को की गई हैं। तहसीलदार ने सरकारी नियमों का उल्लंघन करके ये रजिस्ट्री की हैं। रजिस्ट्री न. 1652 तिथि 10 जुलाई 2020 को की गई। उनका कहना है कि ये जमीन चिरवाड़ी गांव की है। उन्होंने बताया कि इस जमीन पर सिंडिकेट बैंक पलवल और सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक कटेसरा का लोन है। इसके बावजूद तहसीलदार के हस्ताक्षर से रजिस्ट्री की गई। उन्होंने बताया कि शामलातदेह की जमीन की दुरुस्त गिरदावरी एक व्यक्ति विशेष के नाम कराने के लिए तहसीलदार ने हल्का पटवारी पर दबाव दिया तथा उनके आवास पर पुलिस भेजी, फिर पटवारी को अपने आवास पर बुलवाकर दुरुस्ती गिरदावरी करने का आदेश दिया तथा पटवारी को निलंबित कराने की धमकी दी। जबकि इस जमीन के संदर्भ में शिवराम पुत्र रामचंद ने अपील कर रखी है कि इस जमीन की दुरुस्त गिरदावरी न की जाए।
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वहीं हथीन में भी शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिले में फर्जी तरीके से मोटी रिश्वत लेकर तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों द्वारा धड़ल्ले से रजिस्ट्रियां उन जमीनों की हो रही है, जिनकी नहीं हो सकती हैं। लोगों ने मांग की है कि इन मामलों की जांच की जाए।
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संज्ञान में अब तक ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। वे इस मामले में जांच करेंगे तथा जांच में यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी मिलेगा तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सरकार ने 17 अगस्त तक रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी है।
-नरेश नरवाल, जिला उपायुक्त
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