प्रसव के दौरान होने वाली माताओं की मौत को लेकर भारत सरकार ने विशेष अभियान चलाया है। इस अभियान को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का नाम दिया गया है।
अभियान के तहत प्रत्येक माह की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की विशेष मुफ्त जांच की जाएगी। जिला स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों को भी इस अभियान में जुड़ने के निर्देश दिए हैं, जिनमें प्रसव कराए जाते हैं। शहर के छह निजी अस्पतालों ने नौ जुलाई से अपने अस्पतालों में यह अभियान शुरू भी कर दिया है।
देशभर में प्रसव के दौरान काफी तादात में गर्भवती महिलाओं की मौत हो जाती है। गर्भावस्था में महिलाओं की पूरी तरह जांच ना होना भी इसका एक बड़ा कारण है। जिसे लेकर अभियान शुरू किया गया है, ताकि गर्भावस्था के दौरान सभी जांच हो जाएं व समय रहते उनका निदान हो सके। जिससे सुरक्षित प्रसव संभव हो और प्रसव के दौरान मां को सुरक्षित रखा जा सके।
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पहले दिन नहीं आए सकारात्मक परिणाम
नौ जुलाई को इस अभियान की शुरुआत की गई थी। जिले के 33 निजी अस्पतालों को भी इस अभियान में शामिल होने के निर्देश दिए गए थे। जिनमें से छह निजी अस्पताल अभी तक सिविल सर्जन को इसकी रिपोर्ट कर चुके हैं। नौ जुलाई को जिले भर के सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों में 1240 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिनमें से निजी अस्पतालों में जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या मात्र 21 रही। अब 22 जुलाई को डीसी अशोक कुमार शर्मा आईएमए के साथ बैठक कर निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को अभियान से जुड़ने के लिए जागरूक करेंगे।
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वर्जन
अभियान का उद्देश्य प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं की सलामती सुनिश्चित करना है। जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं की 17 प्रकार की जांच की जाएगी। ताकि यदि कोई कमी हो तो समय रहते उसका निदान किया जा सके और सुरक्षित प्रसव कराया जा सके। निजी अस्पतालों के संचालकों से भी कहा गया है कि वे भी सामाजिक दायित्व निभाते हुए इस अभियान में शामिल हों। उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए 22 जुलाई को आईएमए के साथ बैठक की जाएगी।
-डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सीएमओ, पलवल।