हसनपुर/पलवल। हथिनी कुंड बैराज से छोड़े गए लगभग 8.28 लाख क्यूसेक पानी के बाद यमुना से लगते गांवों में बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है। कई गांवों में तो पानी घुसने लगा है। बाढ़ के खतरे को देख जिला प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय हो गया है तथा जिन गांवों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है, उन गांवों के लोगों को गांवों को खाली करने के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रशासन द्वारा इसके लिए मुनादी कराई जा रही है तथा अधिकारियों द्वारा मौके पर जाकर संपर्क किया जा रहा है तथा उन्हें गांवों को खाली करने को कहा जा रहा है। जिन गांवों को खाली कराया जा रहा है, उनके लिए प्रशासन द्वारा यमुना से लगते ऊपरी क्षेत्र में बसे गांव अच्छेजा में राहत कैंप लगाया गया है, ताकि ग्रामीणों को उस राहत कैंप में ठहराया जा सके। हसनपुर में मोबलीपुर गांव में राहत कैंप लगाया जा रहा है।
इतना ही नहीं जिला प्रशासन ने बाढ़ के खतरे को देखते हुए सेना से भी संपर्क किया है तथा प्रभावित गांवों में लोगों व पशुओं को पानी से सुरक्षित निकालने के लिए नावों का भी इंतजाम कर दिया है। प्रशासन की तरफ से सात नावों का इंतजाम किया गया है तथा जहां बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है, उन गांवों में गोताखोर भी तेनात कर दिए हैं। पुलिस व प्रशासन की टीम के अलावा पशु पालन विभाग, स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर तैनात कर दी गई है। साथ ही खाद्य आपूर्ति विभाग के माध्यम से अच्छेजा गांव में लगाए गए राहत कैंप में खाने व पीने का पूरा इंतजाम करा दिया गया है।
खराब हुई फसल
हथिनी कुंड बैराज से छोड़े गए पानी के बाद पलवल सीमा के अंदर यमुना से लगते जिन गांवों के जंगलों में पानी घुसा है, उससे धान, बाजरा, मक्का आदि की फसल पूरी तरह से डूब गई है। इसके साथ ही पशुओं के लिए चारे का इंतजाम करके रखा गया सारा चारा भी पानी में डूब गया है। मंगलवार को ग्रामीणों ने प्रशासन द्वारा मुहैया कराई गई नावों के माध्यम से पानी को पार कर सुरक्षित स्थान पर रखे चारे को लाकर पशुओं के खाने का इंतजाम किया। वहीं ग्रामीणों ने अपने सामान को बांधना शुरू कर दिया है।
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20 साल में पहली बार छोड़ा गया है इतना अधिक पानी
बताया जा रहा है कि 20 साल में पहली बार हथिनी कुंड बैराज से इतना ज्यादा पानी छोड़ा गया है। पिछले वर्ष भी इन दिनों छह लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जबकि इस बार आठ लाख, 28 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है। इससे भले ही जिले में जल स्तर के बढ़ने की संभावना है, लेकिन उससे ज्यादा जिले की करीब 35 किलोमीटर क्षेत्र परिधि जो कि यमुना के साथ-साथ गांव बसे हुए हैं, उनमें बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। यदि इस 35 किलोमीटर की परिधि में पानी भरा तो करीब पांच हजार एकड़ से भी ज्यादा फसल नष्ट हो जाएगी तथा एक दर्जन से भी अधिक गांवों में पानी भर जाएगा। जिससे उनका लाखों रुपये का नुकसान हो जाएगा।
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खाने-पीने का पूरा इंतजाम किया गया है
एसडीएम जितेंद्र कुमार ने बताया कि यमुना से लगते उन सभी गांवों को खाली कराने के आदेश दे दिए गए हैं, जिनमें बाढ़ का खतरा बन गया है। उन गांवों के लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए गांव अच्छेजा सहित यमुना किनारे बसे उन सभी ऊपरी क्षेत्रों में ठहराया जाएगा, जहां पानी नहीं पहुंच सकता। उनके लिए फिलहाल अच्छेजा में राहत शिविर लगा दिया गया है तथा खाने-पीने का इंतजाम किया गया है। पशुओं के लिए पशु पालन विभाग से चारे का इंतजाम करने के आदेश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी दवाइयों के साथ अच्छेजा में पहुंच गई है तथा प्रभावित गांवों के लोगों को हर संभव राहत देने का प्रयास किया जा रहा है।