पलवल। दिवाली के दिन जिले में हुई जमकर आतिशबाजी के बाद प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। जिसके कारण सोमवार की सुबह लोगों को परेशानी हुई। प्रदूषण के कारण सुबह सैर करने वाले लोगों की संख्या भी कम दिखाई दी। प्रदूषण इतना अधिक हो गया कि लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत आने लगी और आंखों में जलन होने लगी। प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा प्रदूषण मात्रा की जांच में पीएम-10 का स्तर 249 मिला। जबकि पीएम-2.5 का स्तर 350 के पार यानी 359 मिला।
पिछले कुछ सालों से पलवल प्रदूषित होता जा रहा है। इसका कारण ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों द्वारा पराली जलाना और शहरी क्षेत्रों में कूड़े के ढेर और टायर जलाना है। इसके अलावा पलवल में यातायात व्यवस्था का खराब रहना भी प्रदूषण बढ़ने का एक मुख्य कारण बनता जा रहा है। जिसके चलते पलवल अब दिल्ली एनसीआर के अन्य प्रदूषित शहरों, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली में शामिल होने लगा है। पलवल में प्रदूषण का एक मुख्य कारण दिल्ली और एनसीआर क्षेत्रों में स्थित उद्योगों से यमुना के माध्यम से आने वाला दूषित पानी भी माना जाता है। यहां बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है और किसानों एवं लोगों को पराली और कूड़ा नहीं जलाने के लिए जागरूक कर रहा है। साथ ही पराली जलाने वाले किसानों के लगातार चालान भी काटे जा रहे हैं, फिर भी प्रदूषण कम नहीं हो रहा है।
पीएम-10 और पीएम-2.5 के अलावा सल्फर डाइ ऑक्साइड, ओजोन, कार्बन मोनोऑक्साइड, बेंजीन, नाइट्रेट ऑक्साइड के स्तर में भी काफी बढ़ोत्तरी हुई है। इन सबकी जानकारी सचिवालय में प्रदूषण की जांच के लिए लगाई गई मशीन की रिपोर्ट से पता चला है। सोमवार को पीएम-10 का स्तर 249 मिला, वहीं पीएम-2.5 का स्तर 359, सल्फरडाइ ऑक्साइड की मात्रा 8, ओजोन की मात्रा 64, कार्बन मोनोक्साइड की मात्रा 104, बेंजीन की मात्रा 6.10 तथा नाइट्रेट ऑक्साइड की मात्रा 43 पाई गई।
सामान्य स्तर होना चाहिए 50 से 100
प्रदूषण नियंत्रण विभाग की माने तो स्वास्थ्य के लिए हवा की बेहतर गुणवत्ता के लिए पीएम 2.5 का स्तर 50-60 और सामान्य स्तर 50-100 तक होना चाहिए। लेकिन फिलहाल यह काफी ज्यादा है। इसे कम और सामान्य स्तर पर रखने के लिए प्रयास करने होंगे। इसके लिए लोगों में जागरूकता जरूरी है। पलवल का प्रदूषण स्तर ठीक रखने के लिए सरकार और प्रशासन को कड़े कदम उठाने होंगे और लोगों को इसके लिए जागरूक करने के साथ-साथ प्रदूषण फैलाने पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी।
शहर के वरिष्ठ चिकित्सक डा. प्रशांत गुप्ता का कहना है कि प्रदूषण बढ़ने से सबसे ज्यादा परेशानी सांस के मरीजों को होती है। सांस के मरीजों का घरों के अंदर भी बैठना मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है कि जिस तरह से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, ऐसे में सांस के खासकर अस्थमा के मरीजों को घरों से बाहर निकलने में परहेज करना चाहिए। मुंह पर मास्क पहनना चाहिए और सामान्य लोगों को भी सुबह और शाम की सैर फिलहाल बंद कर देनी चाहिए। यह प्रदूषण का बढ़ता स्तर सामान्य लोगों में भी सांस जैसी बीमारियां बढ़ा सकता है। इसलिए सावधानी बरतनी चाहिए।
प्रदूषण कम करने के हो रहे प्रयास
जिला उपायुक्त यशपाल का कहना है कि जिले में प्रदूषण कम करने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। जो किसान पराली जलाते मिल रहा है, उनके चालान भी किए जा रहे हैं। पिछले दिनों ही तीन किसानों के ऐसा करते मिलने पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है। कूड़ा जलाने वालों पर भी निगरानी की जा रही है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।