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गांव गढ़ी पट्टी में हरित पट्टी बनाकर पौधे लगाएं

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होडल के गांव गढ़ी में बना डंपिग स्टेशन - फोटो : Palwal
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होडल। नगर परिषद में शामिल होने के बाद गांव गढ़ी पट्टी में कूड़ा डंपिंग स्टेशन बनाने के मामले के संबंध में ग्रामीणों और नगर परिषद के बीच चल रहे विवाद में लोगों के लिए राहत भरी खबर है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) द्वारा इस मामले में नगर निकाय विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि गढ़ी पट्टी में बनाए गए कूड़ा डंपिंग स्टेशन पर स्वच्छता बनाते हुए वहां हरित पट्टी बनाकर पौधे लगाए जाएं तथा कूड़े से उठ रही गंध को दूर करने के इंतजाम किए जाएं। एनजीटी के इस निर्देश के बाद ग्रामीणों में खुशी है।
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दो साल पहले गांव गढ़ी सहित होडल शहर से लगते कई गांवों को नगर परिषद में शामिल किया गया था। इसके बाद नगर परिषद द्वारा कूड़ा डंपिंग स्टेशन बना दिया गया। डंपिंग स्टेशन बनाते ही होडल शहर से निकलने वाली प्रतिदिन गंदगी और कूड़े को वहां डलवाना शुरू कर दिया। जिसे देख ग्रामीणों ने विरोध करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते वहां विरोध बढ़ गया। विरोध इतना बढ़ गया कि डंपिंग स्टेशन पर कूूड़ा डालने वाले ठेकेदार और ग्रामीणों के बीच मारपीट तक हो गई। पुलिस द्वारा ठेकेदार के खिलाफ ग्रामीणों के बयान पर मुकदमे भी दर्ज हुए।
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मामले को निपटाने के लिए पंचायत भी हुई
गांव गढ़ी पट्टी से डंपिंग स्टेशन हटाने के लिए दो-तीन बार गांव के मंदिर पर पंचायत भी हुई। पंचायत में ग्रामीणों के साथ-साथ पार्षदों और नगर परिषद अधिकारियों को भी बुलाया गया, लेकिन विवाद के कारण मामला सुलझ नहीं पाया। ग्रामीणों ने नगर परिषद के समक्ष डंपिंग स्टेशन के पास मंदिर, स्कूल और गांव का तालाब होने की बात भी रखी, लेकिन परिषद अधिकारी वहीं पर कूड़ा डालने पर अड़े रहे। पंचायत में भी हाथापाई तक की नौबत आ गई थी।
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ग्रामीण जयपाल ने दायर की थी याचिका
ठेकेदार और ग्रामीणों के बीच होते झगड़ों को देख गांव निवासी जयपाल ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय तथा एनजीटी में याचिका दायर कर दी। एक साल तक चले इस मामले में सारे तथ्य, मंदिर, स्कूल व तालाब के फोटो तक अदालत में पेश किए गए। अब एनजीटी द्वारा नगर निकाय विभाग को आदेश दिए गए हैं कि डंपिंग स्टेशन वाले स्थान को स्वच्छ किया जाए तथा वहां हरित पट्टी बनाकर पेड़-पौधे लगाए जाएं। वहां कूड़े और गंदगी से उठ रही गंध को दूर करने के इंतजाम किए जाएं।
सीएम से मिलने बाद भी नहीं हुई थी सुनवाई
याचिका दायर करने वाले जयपाल ने बताया कि गांव की पंचायती जमीन पर कूड़ा डंपिंग स्टेशन नहीं बनाने की मांग के संबंध में गांव के लोग नगर परिषद अधिकारियों, एसडीएम, उपायुक्त, विधायक, केंद्रीय राज्यमंत्री तथा मुख्यमंत्री तक से मिले थे, लेकिन किसी ने ग्रामीणों की नहीं सुनी। क्योंकि, डंपिग स्टेशन का ठेकेदार स्थानीय विधायक का भाई था। जब उनकी सुनवाई सरकार के स्तर पर नहीं हुई तो मजबूरी में उन्हें अदालत का सहारा लेना पड़ा। उन्हें खुशी है कि अदालत ने उनकी सुनी तथा उनकी समस्या को समझा। अब यहां पेड़-पौधे लगने से हरियाली आएगी। गांव के लोग भी अपने स्तर पर अब यहां पौधे रोपने का काम करेंगे।
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