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कहीं धरना व जाम तो कहीं नारेबाजी, सड़कों पर उतरने लगे लोग

Wed, 07 Dec 2016 04:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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लाइन - फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के दुष्परिणाम अब सामने आने लगे हैं। नोटबंदी के 28वें दिन लोगों का हौंसला पूरी तरह से जवाब देता नजर आया, व कैश के लिए गांव व शहर सभी जगह मारामारी बढ़ती दिखी। कैश के लिए कहीं लोगों ने  सड़क जाम कर धरना दिया, तो कहीं नारेबाजी व छीनाझपटी हुई। 
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वहीं प्लास्टिक मनी से खरीद करने के अरमान भी पूरे होते नहीं दिख रहे हैं। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह है कि पांच फीसदी दुकानदारों के पास भी स्वाईप मशीनें नहीं हैं। जहां मशीने हैं, तो सर्वर डाऊन रहते हैं, जिसके चलते कार्ड स्वाईप नहीं होते। हालांकि बड़ी संख्या में दुकानदार बैंकों में स्वाईप मशीनों के लिए आवेदन कर रहे हैं, लेकिन बैंक प्रबंधक उन्हें एक माह तक इंतजार करने की बात कह रहे हैं। कई राष्ट्रीयकृत बैंकों के प्रबंधकों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि कैश की किल्लत लंबे समय तक स्माप्त नहीं होने वाली, क्योंकि सरकार बैंकों को सीमित मात्रा में ही कैश देना चाहती है। 
मंगलवार को कैश को लेकर सारा दिन जगह-जगह तनाव की खबरें आती रहीं। गांव बामनीखेडा में सिंडिकेट बैंक के बाहर लोगों ने कैश ना मिलने को लेकर बैंक के बाहर धरना शुरू कर दिया। गुस्साए लोग नारेबाजी करते हुए सड़क पर आ गए व हाईवे पर जाम लगा दिया। बैंक प्रबंधन ने मामले की सूचना गांव के सरपंच व सदर थाना पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस व सरपंच ने लोगों को समझा-बुझा कर शांत कराया। करीब 20-25 मिनट तक लगे जाम के चलते हाईवे पर वाहनों की कतारें लग गईं। हालांकि एसएचओ संदीप मोर ने कहा कि जाम लगाने से पहले ही लोगों को समझा लिया गया था। वंही बैंक मैनेजर अमित हंस का कहना था कि वहां मौजूद लोग बैंक कर्मचारियों को कार्य नहीं करने दे रहे थे। पुलिस के आने के बाद लोग  शांत हुए व कैश बाँटना शुरू किया गया।
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