संवाद न्यूज एजेंसी
होडल । एक ओर क्षेत्र में जहां तापमान 46 पार हो रहा है और भीषण गर्मी से लोगों का जीना दूभर हो रहा है , दूसरी ओर इस गर्मी में गांव बंचारी की जनता एक - एक बूंद पानी को तरस रही है। गांव के पिछले दो महीनों से पेयजल संकट बना हुआ है, जिसके कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण अपने और पशुओं की प्यास बुझाने के लिए दर - दर की ठोकरें खाने को विवश हैं। बृहस्पतिवार को ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया और एकत्रित होकर लघु सचिवालय स्थित उप मंडल कार्यालय पहुंच गए, जहां उन्होंने जमकर प्रदर्शन किया। बाद में ग्रामीणों ने एसडीएम रणवीर सिंह लोहान को मुख्यमंत्री के नाम शिकायत दी।
ग्रामीण महिलाओं के गुस्से को देखते हुए एसडीएम ने जन स्वास्थ्य विभाग के एसडीओ को अपने कार्यालय में बुला लिया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने एसडीएम सिंह को बोतलों में बंद गंदा पानी भी दिखाया और प्रश्न किया कि क्या यह पानी पीने योग्य है। महिलाओं ने विभागीय एसडीओ पर सीधा आरोप लगाया कि वह इस समस्या को लेकर कई बार उनसे शिकायत कर चुकी हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी हैं कि समस्या का समाधान करने के बजाय उल्टे ग्रामीणों पर ही अवैध पेयजल कनेक्शन लगाने के आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे हैं। महिलाओं ने एसडीओ पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विभाग ने होडल में ही उनका प्रमोशन कर जेई से एसडीओ बना दिया है, अब वह अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी के साथ निभाएं, जिस पर एसडीएम सिंह ने एसडीओ को फटकार लगाते हुए कहा कि बहुत हो चुका है, अब ग्रामीणों की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का काम करें। ग्रामीण हेमराज,देवदत्त, प्रेमचन्द, राजबीर, मुकेश, राजबाला, किरन, बिल्ला, हेमबती, टेकचन्द, ज्योति, विनोद सहित ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि पिछले कई महीनों से पीने के पानी का प्रेशर कम आ रहा है।
इस मामले में कई बार विभागीय अधिकारियों, जन प्रतिनिधियों व टोल फ्री नंबर पर भी शिकायत की जा चुकी है। महिलाओं का कहना था कि जब भी शिकायत करते हैं तो विभागीय अधिकारी कोई सुनवाई नहीं करते हैं। विभागीय अधिकारी इस मामले में जरा भी गंभीर नहीं हैं। महिलाओं ने एसडीएम से कहा कि अगर उनकी समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वह सैकडों की संख्या में फिर से उन्हें शिकायत देंगी। जिस पर एसडीएम रणवीर सिंह लोहान ने विभागीय एसडीओ अजय कांगडा को स्पष्ट आदेश दिए कि वह तुरंत प्रभाव से समस्या का समाधान कराकर उन्हें अवगत कराएं, जिसके बाद वह स्वयं गांव में पहुंचकर मौका निरीक्षण भी करेंगे। एसडीएम के आश्वासन के बाद ही ग्रामीण घरों को लौटे।