हाईकोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायालय का फैसला बरकरार रखा, सिंचाई विभाग की अपील खारिज
सुप्रीम कोर्ट नहीं जाने पर किसानों को मिलेगा भुगतान
शेर सिंह डागर
नूंह। मेवात की बहुप्रतीक्षित कोटला झील परियोजना से जुड़े 108 एकड़ भूमि अधिग्रहण मामले में किसानों के पक्ष में फैसला आया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सिंचाई विभाग की अपील खारिज करते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय, नूंह के 23 अगस्त 2024 के फैसले को बरकरार रखा है। इस निर्णय के बाद किसानों को ब्याज सहित करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा मिलने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। यदि सिंचाई विभाग सुप्रीम कोर्ट का रुख नहीं करता है तो किसानों को जल्द मुआवजे का लाभ मिल सकेगा।
लंबे समय से मुआवजे के लिए लड़ रहे किसानों का कहना है कि यह फैसला उनके अधिकारों की जीत है।
मेवात के लिए क्यों अहम है यह फैसला
यह मामला केवल मुआवजे तक ही सीमित नहीं, बल्कि मेवात की सबसे महत्वपूर्ण जल संरक्षण परियोजनाओं में शामिल कोटला झील के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। अरावली की तलहटी में करीब 5,000 एकड़ क्षेत्र में फैली यह झील बरसाती पानी के संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाने, सिंचाई और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कोटला झील की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आवश्यकता पड़ने पर यहां का पानी यमुना तक पहुंचाया जा सकता है और जरूरत के समय उसी मार्ग से यमुना का पानी वापस झील में भी लाया जा सकता है। भविष्य में यह व्यवस्था दक्षिण हरियाणा के जल प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
फैसले के बाद किसान आसिफ अली व सईद एडवोकेट ने सरकार से मांग की है कि झील के लिए अधिग्रहित क्षेत्र को केवल 108 एकड़ तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसका दायरा बढ़ाया जाए, ताकि झील अपनी मूल क्षमता के अनुरूप विकसित हो सके। किसान वहीद, जमील, शौकीन कोटला का कहना है कि यदि झील का विस्तार किया जाता है तो इससे भूजल रिचार्ज होगा, सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी और पूरे क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
पर्यटन की भी अपार संभावनाएं
विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार का मानना है कि यदि कोटला झील का वैज्ञानिक ढंग से विकास किया जाए तो यह मेवात का प्रमुख इको-टूरिज्म और नेचर टूरिज्म केंद्र बन सकती है। अरावली की पहाड़ियों के साथ स्थित यह क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखता है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। जलस्तर भी ऊंचा होगा।
कोट
आगे क्या कार्रवाई करनी है, उसे लीगल एडवाइस के लिए उच्च अधिकारियों को भेज दिया है। सुप्रीम कोर्ट जाना है या नहीं इस बात पर कानूनी सलाह के बाद ही उच्च अधिकारी फैसला लेंगे। कोर्ट के फैसले सहित अन्य दस्तावेजों को ऊपर भेज दिया है।
-आफताब रहमान, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग, नूंह