संवाद न्यूज एजेंसी
पिनगवां। राज्य सरकार की बिजली निजीकरण नीति और हरियाणा एग्री डिस्कोम बनाने के निर्णय के विरोध में चल रहे बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को अब ग्राम पंचायतों का भी समर्थन मिलने लगा है। क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों ने समर्थन पत्र जारी कर निजीकरण का विरोध जताया है। सरपंचों का कहना है कि कृषि फीडर पहले से ही अलग हैं और इनका अधिकांश कार्य टेंडर के माध्यम से कराया जा रहा है। ऐसे में नई कंपनी बनाकर बिजली व्यवस्था का निजीकरण किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं के हित में नहीं है। पंचायत प्रतिनिधियों ने आशंका जताई कि इससे बिजली सेवाएं महंगी होने के साथ कर्मचारियों और उपभोक्ताओं दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
ग्राम पंचायतों ने सरकार से गुरुग्राम और नूंह में समानांतर वितरण लाइसेंस की प्रक्रिया तत्काल रद्द करने की मांग की है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर भी तुरंत रोक लगाने की मांग उठाई है। पंचायतों ने कहा कि सरकार बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने के बजाय मौजूदा सरकारी ढांचे को मजबूत करे, ताकि किसानों और आम उपभोक्ताओं को बेहतर एवं सस्ती बिजली उपलब्ध हो सके।