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Palwal News: 15 लाख की आबादी पर केवल एक एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस

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एएलएस एंबुलेंस के अंदर की तस्वीर। संवाद
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कागजों में दो एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस, हकीकत में एक ही मानकों पर खरी, मरीजों को हो रही परेशानी
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संवाद न्यूज एजेंसी


पलवल।
जिले में एंबुलेंस व्यवस्था गंभीर संकट से जूझ रही है। 15 लाख से अधिक आबादी वाले जिले में एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस के नाम पर सिर्फ एक ही पूरी तरह कार्यशील वाहन उपलब्ध है, जबकि दूसरी को दिखावे के तौर पर मॉडिफाई कर तैयार किया गया बताया जा रहा है।

कोरोना काल के बाद जिले में 33 एंबुलेंस तैनात की गई थीं, लेकिन वर्तमान में दो एंबुलेंस कंडम घोषित हो चुकी हैं और दुर्घटनाग्रस्त। इस तरह जिले में 30 एंबुलेंस सक्रिय हैं, जो बढ़ती आबादी के मुकाबले बेहद कम मानी जा रही हैं।
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जिले में मौजूद 30 एंबुलेंस को चलाने के लिए 85 ड्राइवरों और 38 आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन (ईएमटी) तैनात हैं। इनके सहारे 15 लाख से अधिक की आबादी का जिम्मा है। इसके अलावा जच्चा-बच्चा को घर छोड़ने के लिए तीन किलकारी एंबुलेंस हैं। इनमें से जिला नागरिक अस्पताल नौ और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में 21 एंबुलेंस चल रही हैं।
पांच लाख की आबादी पर एक एएलएस एंबुलेंस की जरूरत

जिला अस्पताल में तैनात फ्लीट मैनेजर संजय सिंह के अनुसार स्वास्थ्य मानकों के हिसाब से पांच लाख की आबादी पर कम से कम एक एएलएस एंबुलेंस जरूरी है। ऐसे में जिले के लिए चार एएलएस एंबुलेंस की आवश्यकता है। वर्तमान में जिले में केवल दो ही एएलएस एंबुलेंस है, जिनमें से एक को एएलएस के रूप में मोडीफाइड किया गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक है। होडल, हथीन, अलावलपुर, औरंगाबाद और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर सीमित एंबुलेंस हैं, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सेवा लगभग अनुपलब्ध है।


क्या है एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस

एएलएस एंबुलेंस एक आईसीयू की तरह होती हैं, जिनमें गंभीर मरीजों के लिए हर सुविधा मौजूद होती है। यदि किसी गंभीर मरीज को रेफर किया जाता है तो देश के किसी भी अस्पताल में सुरक्षित ले जाने का काम ये ही एंबुलेंस करती हैं। इनमें सभी जीवन रक्षक उपकरण होते हैं। आकस्मिक स्थिति के समय जरूरी दवाओं, वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर सहित अन्य उपकरणों की भी सुविधा होती है। गोल्डन समय में सपोर्ट मिलने से बहुत से गंभीर रोगियों की जान बच जाती है। जिले की आबादी और बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के बाद भी इस एंबुलेंस की संख्या अब तक बढ़ी नहीं है।
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कोट

उच्चाधिकारियों को कंडम हुई एंबुलेंस और एएलएस एंबुलेंस के बारे में पत्र लिखकर अवगत कराया जा रहा हैं। हायर सेंटर रेफर होने वाले गंभीर मरीजों को यह एंबुलेंस मिलती है। अभी इनकी संख्या नहीं बढ़ी है। -डॉ. संजय शर्मा, नोडल अधिकारी, पलवल
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