खंड के गांव खिल्लूका में फैले मौसमी बुखार एवं संदिग्ध बुखार ने 20 दिनों में 9 लोगों की जान ले ली है। अभी भी गांव के सैकड़ों लोग निजी क्लीनिकों में इलाज करा रहे हैं।
गांव के युवा समाजसेवी मुजाहिद अली ने बताया कि गांव में हारून की बेटी अरशीना, शहीन के पुत्र मुनासिब, ईसराइल की बेटी बसकरी, मुंशी के पुत्र फजरू, शमशू के पुत्र आस मोहम्मद, अली हुसैन की पत्नी हुसैनी, सहाबुद्दीन की पत्नी रूखसी एवं लियाकत के दो बेटों की मौतें हो चुकी हैं।
हालात इतने गंभीर हैं कि लगभग 7000 की आबादी वाले इस गांव में एक भी ऐसा घर नहीं बचा है जहां रोगों के ज्वर ने दस्तक न दी हो। गांव निवासी एवं ब्लॉक समिति सदस्य अनीशा ने बताया कि गांव में भारी संख्या में संदिग्ध बुखार के मरीज हैं। सामान्य परंपरागत चिकित्सा से उक्त बुखार उतर नहीं रहा है। लैब की रिपोर्ट में कई मरीजों को मलेरिया होने की रिपोर्टें भी मिली हैं।
ग्राम पंचायत के पंच मुबारिक ने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं खिल्लूका में उपलब्ध ही नहीं हैं। इलाके में खिल्लूका के साथ कई गांव लगते हैं परंतु विभाग ने अभी तक कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं खोला है। हथीन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जाते हैं तो वहां कारगर दवाईयां उपलब्ध नहीं होतीं। इस बारे में जिले के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर जेपी प्रसाद ने बताया कि उक्त गांव में इतनी मौतें होने की सूचना उनके पास नहीं थी। अब उक्त गांव में जाकर बचाव के उपाय किए जायेंगे तथा मरीजों के ब्लड सैंपल भी लेंगे।