पलवल। दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहे धरने में बृहस्पतिवार को गुरु गोबिंद सिंह प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम के लिए अलग से पंडाल लगाया गया। तीन घंटे तक हुए शबद कीर्तन में विभिन्न स्थानों से आए गायकों ने भजन पेश किए। वहीं विभिन्न गुरुद्वारों से आई संगत के प्रवचन हुए। संकीर्तन में हिंदू-मुस्लिम-सिख एकता की अनूठी झलक देखने को मिली।
शबद कीर्तन के दौरान कार सेवा से बाबा गुरप्रीत सिंह, खडूर साहब से बाबा देंवद्र सिंह, बाबा जयमल सिंह, सुखदेव सिंह, पटियाला से बाबा लखबीर सिंह व गुरु का ताल गुरुद्वारा आगरा से बाबा जोगा सिंह के प्रवचन हुए। वहीं फरीदाबाद से जगजीत कौर पन्नू के नेतृत्व में आई संगत व कवि बीर सिंह घोड़ी वाले ने भी भजन गाए।
राष्ट्रवादी विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि सिखों के 10वें गुरू गोबिंद सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए अपने पूरे परिवार की कुर्बानी दे दी। उनके चार छोटे-छोटे बच्चों को जिंदा दीवार में चिनवा दिया गया। उन्होंने अपने 42 साथियों के साथ पूरी सेना के साथ युद्ध लड़कर धर्म की रक्षा की थी। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का एक ही मालिक है। विभिन्न ग्रंथों में इसका उल्लेख किया गया है। धरना स्थल से पीछे आयोजित शबद कीर्तन में भारी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शामिल हुए। सभी ने अपने सिर ढककर गुरू गोबिंद सिंह का जीवन परिचय व भजन सुने। गांव आलीमेव व रूपडाका से आए मुस्लिमों ने प्रसाद के रूप में फल वितरित किए। इस अवसर पर जफर यदुवंशी ने कहा कि सभी को एक दूसरे के धर्मों का सम्मान करना चाहिए और यही भारत देश की परंपरा है।