पलवल। शहरों के साथ-साथ अब गांवों में भी बंदरों का उत्पात बढ़ने लगा है। लॉकडाउन के बाद से गांवों में बंदरों की संख्या अधिक दिखाई देने लगी है। पेड़ों और छतों पर बंदरों के झुंड देखे जा सकते हैं। आए दिन बंदर किसी न किसी पर हमला कर घायल कर देते हैं। बंदरों के भय से लोगों ने छतों पर जाना बंद कर दिया है। लोग ग्राम पंचायतों के साथ-साथ प्रशासन से भी बंदरों को पकड़वाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन, प्रशासन और ग्राम पंचायतें इंतजाम नहीं कर पा रही हैं। मंगलवार को भी गांव बाता में बंदरों ने एक व्यक्ति को काट लिया। घायल व्यक्ति का अस्पताल में उपचार चल रहा है।
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लॉकडाउन में बंदरों की संख्या बढ़ी
ग्रामीणों की मानें तो लॉकडाउन के दौरान गांवों में बंदरों की संख्या बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि छज्जूनगर नहर और आसपास के मंदिरों पर भोजन नहीं मिलने के कारण बंदरों ने गांवों का रुख कर लिया। गांवों में बंदरों को भोजन के अलावा पेड़ों की छांव तथा खाने-पीने का सामान भी मिल जाता है। इससे बंदरों की संख्या ग्रामीण इलाकों में अधिक बढ़ गई है। इसके अलावा दूसरे क्षेत्रों के लोग भी बंदरों को आसपास के जंगलों में छोड़ जाते हैं।
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एक दर्जन से अधिक लोग करवा चुके हैं उपचार
भूख से व्याकुल बंदर अब खूंखार बनते जा रहे हैं। घरों की छतों और आंगन से यदि कोई बंदरों को भगाने का प्रयास करता है तो वे उन पर हमला बोल देते हैं। बंदर काट भी लेेते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों के काटे जाने के मामले बढ़े हैं। पिछले तीन माह में विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर एक दर्जन से अधिक लोग बंदरों के काटने का उपचार करवा चुके हैं।
कान और हाथ पर काटा
गांव बाता में सुरेश ने बंदरों को छत से भगाने का प्रयास किया तो बंदरों ने उन पर हमला बोल दिया। जब तक सुरेश अपने आप को संभाल पाते, तब तक बंदरों ने कान और हाथ पर काट लिया। इसके अलावा शरीर पर भी कई जगह पर काट लिया। इससे पहले हसनपुर में राम चंद व दुर्गे को भी बंदर काट चुके हैं। वहीं, गांव बडौली के पास छत पर खेल रहे बच्चों को बचाने पर मनोहर को बंदरों ने काट लिया था।
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ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बंदरों को पकड़वाने के लिए प्रशासन और ग्राम पंचायतों को इंतजाम करने चाहिए। अब ये बंदर लोगों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।
- राम किशन, बाता
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बंदरों को पकड़वाने के लिए ठेकेदार से बात की है। अन्य गांवों के सरपंचों से भी बात कर रहा हूं। पंचायत अधिकारियों से भी बात हुई है। प्रयास है कि गांवों के लोगों द्वारा ठेकेदार बुलाकर बंदरों को पकड़वाया जाए।
- सुंदर लाल, सरपंच बाता
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ग्रामीण इलाकों में बंदरों की समस्या अभी तक सामने आई नहीं है। फिर भी खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों से बात करूंगा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में देखें और ग्राम सचिवों से रिपोर्ट तैयार करवाएं। बंदरों को पकड़वाने के लिए ठेकेदार बुलवाएं।
- शमशेर सिंह नेहरा, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी