होडल। प्रदेश सरकार दलहनी फसलों के प्रति किसानों का रुझान बढ़ाने के लिए बाजरे की जगह मूंग की खेती करने पर प्रति एकड़ चार हजार रुपये की सहायता धनराशि देगी। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मूंग की खेती करने पर प्रति एकड़ इतना ही खर्च आता है। ऐसे में किसान मूंग की फसल मुफ्त में कर सकते हैं। गत वर्ष जिले में 7 हजार हेक्टेयर में बाजरे की खेती की गई थी। सरकार ने पलवल से करीब हजारों क्विंटल बाजरा खरीदा था। बाद में यही बाजरा सरकार को गरीब परिवारों को निशुल्क बांटना पड़ा। अब यदि किसान सरकार के आग्रह और मिलने वाले बोनस पर मूंग की खेती करते हैं तो इससे किसान और सरकार दोनों को फायदा होगा। (संवाद)
जुलाई के अंत में भी कर सकते है बुआई
किसान जुलाई के आखिर में भी मूंग की बुआई करे तो अच्छी पैदावार हो सकती है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन किसानों ने पिछले वर्ष बाजरे की खेती की थी। इस बार मूंग की खेती करते हैं तो 4 हजार रुपये का फायदा होगा। इसके लिए किसान की गत वर्ष की गिरदावरी रिपोर्ट में बाजरे की खेती होनी चाहिए।
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प्रति एकड़ 10 क्विंटल उगा सकते हैं मूंग
कृषि अधिकारियों का कहना है कि मूंग की कई प्रजातियां उपलब्ध हैं। इनका उत्पादन 4 से लेकर 10 क्विंटल तक है। किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करे तो प्रति एकड़ 10 क्विंटल भी मूंग उगा सकते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
यदि किसान को दो एकड़ में बाजरे की खेती करनी है तो वह आधे एकड़ में बाजरे की खेती करे। बाकी में मूंग की खेती करे। वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर अच्छा उत्पादन मिल सकता है। इसमें खेती पर खर्च भी कम होता है। अब बाजरे की जगह मूंग की खेती करने पर सरकार 4 हजार रुपये प्रति एकड़ सहायता धनराशि देगी।
- डॉ. महावीर सिंह, उपनिदेशक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग