सिविल अस्पताल के सर्जन पर लगाए गए अवैध वसूली के आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग के एडीजी ने अस्पताल का दौरा किया। मामले की जांच के लिए गठित अस्पताल की टीम व दो शिकायतकर्ताओं के अलग-अलग ब्यान दर्ज किए गए। अमर उजाला में छपे समाचार पर स्वास्थ्य मंत्री ने संज्ञान लेते हुए मामले पर रिपोर्ट तलब की थी।
रविवार को लगभग पांच घंटे तक चली गहन पूछताछ के दौरान मामले की कार्रवाई केवल जांच तक ही सिमट कर रह गई। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि करीब पांच घंटे की जांच के बाद भी उन्हें ना तो कोई संतोषजनक जवाब नही दिया गया और केवल जांच करने का आश्वासन मिला है।
ज्ञात रहे कि शुक्रवार को गांव नांगल ब्राहमण निवासी राकेश कुमार, पलवल की आदर्श कालोनी निवासी बिजेंद्र भारद्वाज व नई बस्ती सल्लागढ़ निवासी बलवीर ने सर्जन डॉ. नवीन पर ऑपरेशन करने की एवज में अवैध रुप से पैसे मांगने का आरोप लगाया था। आरोप के दौरान पीड़ितों ने बताया कि सर्जन नवीन ने राकेश कुमार से पांच हजार रुपये तथा बिजेंद्र व बलवीर से 3500-3500 रुपये पीत की थैली आपरेशन करने के लिए मांगे थे।
जिसकी लिखित शिकायत उन्होंने सिविल सर्जन आदित्य स्वरुप गुप्ता को दी। जिस पर सिविल सर्जन ने तीन चिकित्सकों की टीम बनाकर मामले की जांच कराने के आदेश जारी कर दिए और एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट पेश करने को कहा।
रविवार की हुई जांच के दौरान शिकायतकर्ता राकेश हाजिर नही हो पाए लेकिन बिजेंद्र व बलवीर ने अपनी हाजिरी दर्ज कराई। दोनों पीड़ितों ने बताया कि उन्हें सुबह नौ बजे ही अस्पताल बुला लिया गया और लगभग दस बजे से 3 बजे तक उनसे व सर्जन नवीन से अलग-अलग पूछताछ की गई। पीड़ितों ने बताया कि पांच घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान केवल उन्हें जांच करने की बात कहकर आश्वासन दिया गया है।
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पहले भी रहे हैं विवादास्पद डॉक्टर :
-उक्त सर्जन पहले भी विवादास्पद रहे हैं। करीब चार-पांच वर्ष पूर्व आरोपी डॉक्टर की पत्नी अस्पताल में कार्यरत थी तथा डॉक्टर ने अपना क्लीनिक खोला हुआ था। लापरवाही का आरोप लगने पर महिला डॉक्टर ने तत्कालीन एसएमओ डॉ. पसरीचा पर गंभीर आरोप लगा दिए थे। जो कि जांच के दौरान गलत पाए गए। बाद में डॉ. नवीन अस्पताल को अपनी सेवाएं देने लगे। शुक्रवार को जब डॉ. पर अवैध वसूली की मांग की शिकायत हुई थी तो उस समय सीएमओ डॉ. गुप्ता ने कहा था कि आरोपी डॉक्टर के खिलाफ पहले भी शिकायत आई हैं।