उपमंडल के 12 हजार की आबादी वाले गांव खिल्लुका में रैनीवेल परियोजना के शुरू होने के एक दशक बाद भी पीने के पानी की एक बूंद तक उपलब्ध नहीं हो पाई है। गांव वासियों को पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। हजार रुपये प्रति टैंकर देकर ग्रामीणों की जेब ढीली हो चुकी है।
खिल्लुका निवासी आस मोहम्मद, दीन मोहम्मद, भूरी बेगम, कल्लू खां, शाहबुद्दीन, असलूप, इलियास, सद्दीक अहमद व हनीफ आदि ने बताया कि खिल्लुका गांव कौंडल में बने रैनीवेल पानी के बूस्टर से सीधे-सीधे मात्र तीन से चार किलोमीटर ही दूर है, परंतु उनके गांव में आने वाले पानी की पाइप 13 किलोमीटर दूर रुपडाका गांव से जोड़ी गई है।
आसपास के गांवों में रैनीवेल का पानी खुले में बहता है पर उनके गांव को आज तक पानी की एक बूंद नसीब नहीं हुई है। भीषण गर्मी में गांव के लोग आसपास के गांवों से पानी लाने को मजबूर हैं।
गांव वासियों ने बताया कि विभाग ने पानी की सप्लाई के लिए जो ट्यूबवेल लगाया हुआ है, उसका पानी गिरते भूजल स्तर के कारण खारा हो चुका है। खास बात तो यह है कि गांव में आज तक रैनीवेल के पानी के लिए कोई टैंक नहीं बना है।
जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा पहले से निर्मित जो टैंक है, उसमें मोटर नहीं है और न ही गांव की पाइप लाइनों का कनेक्शन किया गया है, जबकि विभाग की फाइलों में रैनीवेल के पानी की रोजाना आपूर्ति दिखाई जा रही है।
ब्लॉक समिति की सदस्य अनीशा का कहना है कि पानी की इस समस्या को विभागीय अधिकारियों व सरकार के समक्ष रखा जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता शाहमुद्दीन खान मेवाती का कहना है कि गांव खिल्लुका को रुपडाका गांव की बजाय कौंडल गांव से सीधे अलग लाइन से जोड़ा जाए।