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लड्डू गोपाल परिधान व झूलों की हुई जमकर बिक्री, बाजारों में दिखी रौनक

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एक दुकान पर लड्डू गोपाल के परिधान व अन्य सामान खरीदते लोग। - फोटो : Palwal
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लड्डू गोपाल की जमकर हुई बिक्री, बाजारों में दिखी रौनक
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पलवल। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस बार 11 और 12 अगस्त यानी दो दिन जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। पूजा से जुड़े सामानों की बिक्री के लिए दुकानों पर रौनक दिखाई दी। लोगों ने लड्डू गोपाल, उनके परिधान, मुकुट, पगड़ी, चंदन, छोटी चारपाई और झूला आदि की जमकर बिक्री की। लकड़ी, स्टील और शीशे के बने आकर्षक झूलों ने लोगों को खूब लुभाया। कोरोना काल में अधिकतर लोग अपने घरों पर ही जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे। वहीं, मंदिरों में दर्शन व पूजा के दौरान कोविड-19 के तहत जारी गाइडलाइन का पालन करना आवश्यक होगा। जिले में कहीं पर भी मटकी फोड़ने और झांकियां निकालने के कार्यक्रम आयोजित नहीं होंगे। दो गज की दूरी बनाकर मंदिरों में भगवान के दर्शन करने होंगे। एक साथ चार से पांच लोगों को ही मंदिर में प्रवेश मिलेगा।
कोविड-19 के कारण सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के तहत ही मंदिरों में पूजा की जाएगी। बिना मास्क लगाए किसी को भी मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा। प्रवेश के दौरान हाथों को सैनिटाइज करना होगा। गाइडलाइन का पालन करवाने के लिए मंदिरों में पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की जाएगी। मंदिर समितियों ने भगवान श्रीकृष्ण के दरबार सजाने की तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। पर्व के दिन कान्हा को झूला भी झूलाया जाएगा। बाल गोपाल को माखन और मिश्री का भोग लगाया जाएगा। क्योंकि, भगवान कृष्ण को माखन, मिश्री और तुलसी के पत्ते बहुत प्रिय हैं। दुकानदार रामेश्वर ने बताया कि कोरोना के बावजूद भी बाजार में खूब ग्राहक आ रहे हैं।
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12 अगस्त को मनाएं पर्व
पंडित नीलेश शास्त्री ने बताया कि वैष्णव मतानुसार कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बुधवार यानी 12 अगस्त को मनाया जाना चाहिए, क्योंकि 11 अगस्त को सप्तमी तिथि रहेगी। वैष्णव मतानुसार, सूर्य उदय की तिथि को ही माना जाता है।
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13 को नंदोत्सव का आयोजन होगा
ज्योतिषाचार्य डॉ. अंजलि जैन ने बताया कि 13 अगस्त को नंदोत्सव का आयोजन होगा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के छह दिन बाद छठी महोत्सव 17 अगस्त को मनेगा। इसके बाद राधाष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी।
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