शहर में जमकर बरसे बदरा, सड़कें जलमग्न
फरीदाबाद। तीन दिन से लगातार रुक-रुक हो रही मूसलाधार बारिश का असर बुधवार को देखने को मिला। सुबह से ही आसमान में घने बादल छा गए। सुबह करीब 10 बजे एक बार फिर जमकर बारिश हुई। इससे शहर में जगह-जगह जलभराव की स्थिति बन गई। वहीं मौसम भी सुहाना हो गया है। तापमान में गिरावट आने के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिली है। मौसम विभाग के अनुसार एक सप्ताह तक मौसम में बदलाव जारी रहेगा। इस दौरान तेज बारिश की संभावना बनी हुई है। पिछले तीन महीने से लोग उमस भरी गर्मी से बेहाल थे।
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सड़कें बनी तालाब, वाहन रेंगते नजर आए
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. अनिल तंवर ने बताया कि मंगलवार रात जिले में कुल 33.6 एमएम बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित अजरौंदा चौक, बाटा चौक, सेक्टर-7, बल्लभगढ़ चौक, ओल्ड फरीदाबाद अंडरपास, एनएचपीसी अंडरपास, सेक्टर-16 पुलिस चौकी के पास, सेक्टर-15 विद्या मंदिर स्कूल रोड, सेक्टर-22-23 चौक, जवाहर कॉलोनी, डबुआ कॉलोनी 60 फुट रोड पर घुटनों तक पानी भर गए। सुबह के समय नौकरीपेशा लोगों को पानी से होकर अपनी कंपनियों तक पहुंचना पड़ा। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग पर जलभराव होने से वाहन चालकों की गाड़ियां पानी में खराब हो गई। इससे उन्हें काफी परेशानी हुई। नीलम फ्लाईओवर, बाटा फ्लाईओवर और बल्लभगढ़ फ्लाईओवर पर यातायात व्यवस्था ठप हो गई। इससे इन सर्कल में वाहन रेंगते हुए नजर आए। इस दौरान ट्रैफिक संभालने में ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
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घरों में भरा पानी
सेक्टर-15ए निवासी वीरेंद गौड़ ने बताया कि सेक्टर में पानी निकासी कोई उचित व्यवस्था नहीं है। इस कारण मंगलवार रात हुई बारिश से सेक्टर के घरों में पानी भर गए। लोगों की रात पानी निकालने में बीती। जलभराव से छुटकारा दिलाने के लिए कई बार नगर निगम अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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अंडरपास में पानी भरा होने से राजमार्ग से कटी कॉलोनी
ग्रीन फील्ड कॉलोनी आरडब्ल्यूए प्रधान वीरेंद्र भड़ाना ने बताया कि ओल्ड फरीदाबाद और एचएनपीसी अंडरपास में जलभराव होने से ग्रीन फील्ड कॉलोनी, सूरजकुंड चार्मवुड सोसाइटी और मेवला महाराजपुर, गांव कॉलोनी, सेक्टर-21बी राजमार्ग से कट गए। दोनों अंडरपास यहां के लोगों के लिए राजमार्ग तक पहुंचने की लाइफ लाइन है। पानी भर जाने के कारण लोगों को चार से पांच किलोमीटर का घूम कर हाईवे तक पहुंचना पड़ता है।