स्वास्थ्य विभाग की पांच सदस्यीय टीम ने किया कॉलेज का निरीक्षण
60 सीटें प्रस्तावित, विद्यार्थियों को नर्सिंग शिक्षा के लिए बेहतर अवसर मिल सकेंगे
9 करोड़ रुपये की लागत से हुआ था तैयार
पलवल। वर्ष 2017 के अंत में बनकर तैयार हुआ नर्सिंग कॉलेज लंबे समय से बंद पड़ा है। अब स्वास्थ्य विभाग ने कॉलेज को दोबारा शुरू करने की कवायद तेज कर दी है। कॉलेज के बंद होने के कारण यह लंबे समय से स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था। स्थानीय लोगों की ओर से कॉलेज को दोबारा शुरू कराने की मांग के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, पहले यह जीएनएम कॉलेज के रूप में प्रस्तावित था। अब वर्तमान जरूरतों और नर्सिंग शिक्षा की मांग को देखते हुए इसे अपग्रेड कर बीएससी नर्सिंग कॉलेज के रूप में शुरू करने की तैयारी की जा रही है। कॉलेज शुरू होने के बाद यहां बीएससी नर्सिंग की 60 सीटें प्रस्तावित हैं। इससे जिले के विद्यार्थियों को नर्सिंग शिक्षा के लिए बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
चंडीगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक के बाद नर्सिंग कॉलेज को दोबारा शुरू करने के लिए पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। टीम ने मंगलवार को कॉलेज का निरीक्षण किया। इस दौरान भवन सहित उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। अब कॉलेज को दोबारा शुरू करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं और संसाधनों से संबंधित रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
नर्सिंग कॉलेज का निरीक्षण करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से पांच सदस्यीय टीम गठित की गई। टीम ने मंगलवार को कॉलेज पहुंचकर भवन और अन्य सुविधाओं का निरीक्षण किया। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज को दोबारा शुरू करने की आगामी प्रक्रिया तय की जाएगी।
शौचालय से लेकर भवन की दुरुस्ती तक की जांच
मंगलवार को नर्सिंग कॉलेज का निरीक्षण करने पहुंची पांच सदस्यीय टीम ने कॉलेज की विभिन्न व्यवस्थाओं की जांच की। टीम ने शौचालयों की स्थिति, खिड़कियों, सीलिंग और विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था का जायजा लिया। इसके अलावा भवन की दुरुस्ती और अन्य जरूरी सुविधाओं को भी जांचा गया, ताकि कॉलेज को दोबारा शुरू करने से पहले आवश्यक कमियों को दूर किया जा सके।
2012 में हुई थी नर्सिंग कॉलेज की घोषणा
नर्सिंग कॉलेज की घोषणा वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने की थी। इसके बाद कॉलेज भवन का निर्माण कार्य शुरू हुआ और करीब 9 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2017 के अंत तक भवन का निर्माण पूरा कर लिया गया। हालांकि, निर्माण पूरा होने के बाद भी कॉलेज लंबे समय तक सुचारू रूप से शुरू नहीं हो सका और भवन बंद पड़ा रहा।
नर्सिंग कॉलेज भवन में बनाए गए अन्य कार्यालय
नर्सिंग कॉलेज भवन का निर्माण पूरा होने के बाद इसका उपयोग नर्सिंग शिक्षा के बजाय अन्य कार्यों के लिए किया जाने लगा। भवन में टीबी वार्ड, आयुष्मान विभाग और सीएमओ कार्यालय बना दिए गए। इसके चलते नर्सिंग कॉलेज को शुरू करने की योजना आगे नहीं बढ़ सकी और भवन लंबे समय तक इसी तरह उपयोग में रहा।
वर्षों से बंद पड़े नर्सिंग कॉलेज को दोबारा शुरू करने की कवायद के तहत स्वास्थ्य विभाग की ओर से करीब सात करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया है। कॉलेज में आवश्यक सुविधाओं को दुरुस्त करने और संसाधन उपलब्ध कराने के बाद इसे दोबारा शुरू करने की योजना है।
पीडब्ल्यूडी और बिजली विभाग से मांगा खर्च का ब्योरा
स्वास्थ्य विभाग ने नर्सिंग कॉलेज भवन के नवीनीकरण और जरूरी मरम्मत कार्यों का अनुमान तैयार करने के लिए पीडब्ल्यूडी और बिजली विभाग से रिपोर्ट मांगी है। दोनों विभागों की ओर से भवन की स्थिति और आवश्यक कार्यों का आकलन कर अनुमान तैयार किया जाएगा। इसके बाद प्राप्त अनुमान के आधार पर कॉलेज को दोबारा शुरू करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वर्जन
मंगलवार को नर्सिंग कॉलेज का निरीक्षण किया गया। इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज को दोबारा शुरू करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. सतेंद्र वशिष्ठ, सीएमओ