पलवल। कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए की जा रही स्क्रीनिंग में जिले ने प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। जिले में 10 लाख से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग कर रिकॉर्ड बनाया। उपायुक्त नरेश नरवाल ने बताया कि डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग अभियान में 920 टीमों और विभिन्न विभागों और स्वयंसेवकों से गठित तीन हजार युवा समितियों के साथ एक लाख 83 हजार 166 घरों का सर्वें किया गया। जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर जाकर प्रत्येक व्यक्ति की जांच कर कोरोना पर नियंत्रण में विशेष भूमिका निभाई।
उपायुक्त नरेश नरवाल ने बताया कि कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ विशेष रणनीति बनाई गई थी। इस रणनीति के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कोविड-19 मरीजों की पहचान के लिए डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग का कार्य किया गया। 10 लाख से ज्यादा आबादी की स्क्रीनिंग हुई। जिले में 10 हजार176 कोरोना संक्रमित हैं। वर्तमान में कोरोना संक्रमित के केवल 151 मामले सक्रिय हैं। मृत्यु दर 1.4 फीसदी है।
उपायुक्त ने बताया कि जिला स्तर पर एक, उपमंडल स्तर पर दो अस्पताला, चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और नौ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा 15 निजी अस्पताल हैं। कोरोना महामारी के चलते जिले में 350 ऑक्सीजन बैड तक की व्यवस्था तैयार की गई थी।
ग्रामीण क्षेत्रों को अलग-अलग खंडों में विभाजित कर घटना कमांडरों को प्रत्यक्ष जानकारी के लिए तैनात किया गया। एसडीएम की निगरानी में रोगियों के विवरण के साथ गांवों में पटवारियों और ग्राम सचिवों के माध्यम से सर्वेक्षण किया गया। युवा समितियां के जरिए रोजाना सभी गांवों पर नजर रखी गई। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की एएनएम, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से बीमार व्यक्तियों की पहचान की गई।
उन्होंने बताया कि कंट्रोल रूम के माध्यम से घर पर आइसोलेट मरीजों का समय-समय पर हालचाल पूछा गया। गांव में ठीकरी पहरे भी लगाए गए। व्यापारियों की बैठक बुला कर भीड़-भाड़ से बचने और बाजार बंद रखने संबंधी हिदायत दी गई। आवश्यक वस्तुओं की दुकानों पर कोविड-19 की सभी गाइडलाइन लागू करवाने बारे निरंतर हिदायत दी गई। लॉकडाउन के दौरान सरकार की सभी हिदायतों को लागू करवाया गया।
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फोटो 04पीएएलपी15 में है।
कैप्शन: उपायुक्त नरेश नरवाल
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