खंड के सरकारी स्कूल दयनीय हालत में हैं। स्कूलों में न तो पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था है और न ही अन्य सुविधाएं। एक स्कूल की हालत तो ऐसी है कि स्कूल बंद होने और खोलने की पूरी जिम्मेदारी ही स्कूल के बाहर चाय की दुकान चलाने वालों के पास रहती है। स्कूल के छात्रों का कहना है कि वह स्कूल बंद होने के समय स्कूल की चाबी बाहर चाय वाले को दे जाते हैं और सुुबह की पारी वाले छात्र चाबी लेकर स्कूल को खोल लेते हैं।
पुराने जीटी रोड पर राजकीय प्राइमरी व माध्यमिक स्कूल का भवन स्थापित है । इस भवन में सुबह की पारी में प्राइमरी (पहली से पांचवीं) तक की कक्षाएं लगती हैं, जिनमें 450 छात्र पढ़ते हैं। दूसरी पारी में माध्यमिक (छठी से आठवीं) के बच्चों को पढ़ाया जाता है, जिसमें 128 छात्र हैं। पहली पारी की कक्षाएं सुबह 7.30 से 12.30 तक लगती हैं जबकि दूसरी पारी की कक्षाओं का समय 12.45 से 6.15 तक का है। दूसरी पारी में पढ़ने वाले छात्रों के अनुसार शाम के समय वह स्कूल के गेट का ताला लगाकर बाहर चाय की दुकान करने वाले को दे जाते हैं, जबकि सुबह स्कूल आने वाले छात्र चाबी लेकर ताला खोल लेते हैं।
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नदराद हैं प्राथमिक सुविधाएं :
- स्कूल में न तो चौकीदार है और न ही स्थायी सफाई कर्मी। इसके चलते छात्र तो परेशान रहते हैं ही, अध्यापकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। एक अध्यापक ने अपना नाम न बताते हुए कहा कि सुबह के समय एक बार सफाई करने के लिए एक महिला आती है, लेकिन बाद में तो कई बार उन्हें खुद छात्रों के साथ मिलकर सफाई करानी पड़ती है। इसके अलावा स्कूल में शुद्ध पेयजल का भी अभाव है। छात्र-छात्राएं हैंडपंप से खारा पानी पीने को मजबूर हैं।
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माध्यमिक के हैडमास्टर रूपचंद का कहना है कि दोपहर की पारी की कक्षाएं छूटने के बाद वह खुद ही स्कूल का ताला लगाकर जाते हैं। सुबह की पारी वालों के पास दूसरी चाबी है। वह इस बात को स्वीकार करते हुए कहते हैं कि उन्हें पता चला है कि बाहर चाय की दुकान चलाने वाला कई बार स्कूल परिसर में ही रहता है। हो सकता है कि उसने डुप्लीकेट चाबी बनवा रखी हो, जिससे वह स्कूल को खोल लेता हो। वह इसका पता करवाएंगे, अगर ऐसा हुआ तो उसके खिलाफ पुलिस में भी शिकायत की जाएगी।