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कानूनों के साथ सरकार की नीयत भी काली : मलिक

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पलवल। संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहा किसानों का धरना 11वें दिन भी जारी रहा। बृहस्पतिवार को धरने में किसानों ने तैयारियां तेज कर दीं। लंगर के लिए पंडाल में टीन शेड को बढ़ाने का काम शुरू कर दिया गया। वहीं पीने के पानी के लिए अलग से टंकी रखवा दी गई। धरने को पूरा दिन समर्थन देने का दौर चलता रहा। बृहस्पतिवार को धरने की अध्यक्षता बड़गुर्जर पाल के पंच होशियार सिंह ने की, जबकि संचालन रूपराम तेवतिया ने किया।
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52 पाल के अध्यक्ष अरुण जेलदार के नेतृत्व में चल रहे धरने में पहुंचे अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र मलिक ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि कानूनों में काला क्या है यह बूझ रहे हैं, जबकि कानूनों के साथ सरकारी की नीयत भी काली है। नीयत में खोट नहीं होता तो बिना किसान संगठनों की सलाह लिए कानून नहीं बनाते।
उन्होंने कहा कि पलवल में दोबारा धरना शुरू करना किसानों की जीत है। इसके लिए समस्त पाल बधाई के पात्र हैं। सरकार दीनबंधु सर छोटूराम के समय में बनाए गए कानूनों को बदल रही है। छोटूराम ने जमींदारी प्रथा को समाप्त करवाया था, जिसे वर्तमान सरकार फिर से लागू कराना चाहती है। प्रधानमंत्री किसानों को आंदोलनजीवी बता रहे है। किसान मजबूरी में आंदोलन करता है, परंतु जब करता है तो सरकार की कमर तोड़ देता है। सरकार को किसानों की मांग मान लेनी चाहिए।
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धरने को डॉ. महावीर सिंह मलिक, राजकुमार ओहलियान, प्रणव, जीता सिंह, धर्मचंद, राजेंद्र सिंह घर्रोट, मूलचंद, रमेश चंद सहित अन्य ने भी संबोधित किया। इस मौके पर सतबीर, विपिन, नेतराम, दुलीचंद, हरप्रसाद, रूपराम दलाल, अच्छेलाल, रोशनलाल व रणवीर ने अपने गीतों के माध्यम से सरकार पर कटाक्ष किए।
लंगर के लिए टीन शेड को बढ़ाया जा रहा
धरना स्थल पर लंगर के लिए बनाई गई रसोई के साथ अब टीन शेड को बढ़ाया जा रहा है। लंगर के लिए किसानों की तरफ से भरपूर सहयोग मिल रहा है, जिसकी वजह से सामान रखने के लिए जगह कम पड़ रही थी। टीन शेड के नीचे ही भोजन कराने की व्यवस्था की जाएगी। बृहस्पतिवार को गांव गोपालगढ़ की तरफ से खाद्य सामग्री लंगर के लिए दी गई।
पीने के पानी के लिए की गई व्यवस्था
धरना स्थल पर पीने के पानी के लिए अलग से व्यवस्था की गई। पानी की टंकी में नलके लगवाए गए हैं, जिससे एक बार में कई लोग पानी पी सकते हैं। इसके अलावा सफाई व्यवस्था को लेकर व्यापक प्रबंध किए गए हैं। तंबुओं की संख्या भी बढ़ती जा रही है।
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