पलवल। शहरों में ही नहीं गांवों में भी जिला उपायुक्त के आदेशों के बावजूद अधिकारी कूड़ा जलाने की घटनाओं को नहीं रोक पा रहे हैं। न ही आज तक कूड़ा जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। हालात ये हैं कि गांवों में भी गलियों के अलावा सड़कों के किनारे भी लगातार कूड़ा जलाया जा रहा है। कूड़ा जलाने से आसपास के क्षेत्र में इतना धुआं हो जाता है कि वहां से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। आजकल तो और भी बुरा हाल रहता है।
जिले में कूड़ा जलाना अब आम बात हो गई है। लोगों की मानें तो वे कूड़ा न उठाए जाने से परेशान होकर उसे जलाते हैं। उनका मानना है कि कूड़ा जलाने से उठने वाला धुएं से इतनी परेशानी नहीं होती है, जितनी कूड़े के ढेरों से उठने वाली बदबू व मच्छर-मक्खियों के कारण होती है। इनसे बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। साथ ही गंदगी में मुंह मारते आवारा पशु भी लोगों के दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। इस कारण वे लोग कूड़े में आग लगा देते हैं।
रविवार की रात भी जिले में ग्रामीण क्षेत्रों की तरफ जाने वाली सड़कों पर कई जगह कूड़ा जलता मिला। इसके अलावा गांवों के अंदर भी लोगों द्वारा जलाया गया कूड़ा मिला। पलवल रसूलपुर रोड पर ही तीन जगह कूड़ा जलता मिला, जिससे उठने वाला धुआं इतना अधिक था कि आसपास कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। रसूलपुर गांव के मोड़ पर तथा उससे पहले छज्जू नगर व रसूलपुर के बीच में कूड़ा जलता मिला। वहीं एक अन्य स्थान पर कूड़ा जला रहे एक व्यक्ति से ऐसा न करने पर उसका कहना था कि प्रशासन से कहकर इसे उठवा दिया करो, फिर आग नहीं लगाएंगे। अब तो हालात ये हैं कि यदि किसी को कूड़ा जलाने से मना किया जाता है तो वह झगड़ा करने पर उतर आता है।
सामाजिक संगठनों से जुड़े कुलदीप सिंह, राजेंद्र कुमार, सुंदर सिंह, मनमोहन सिंह का कहना है कि कूड़ा जलाने की घटनाओं पर प्रशासन को रोक लगानी चाहिए। इसके लिए सख्ती तो बरतनी चाहिए, साथ ही जहां भी कूड़े के ढेर कई-कई दिनों तक पड़े रहते हैं। उन्हें नियमित तौर पर उठवाना चाहिए, ताकि लोग कूड़े में आग न लगाएं। ऐसी व्यवस्था होने के बाद कूड़ा जलाने पर रोक लगाई जा सकती है।
ग्राम सचिवों को इस बारे में आदेश जारी कर दिए गए हैं कि जहां भी कोई कूड़ा जलाता मिले, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उस पर जुर्माना लगाया जाए। ग्राम पंचायतों में सचिवों के माध्यम से कूड़ा जलाने की घटनाओं पर रोक लगाई जाएगी।
- शमशेर सिंह नेहरा, जिला खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी