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पांच दिन से सिविल अस्पताल में खराब पड़ी है अल्ट्रासाउंड मशीन

Tue, 19 Jul 2016 04:47 PM IST
अमर उजाला ब्ययूराो
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HOSPITAL - फोटो : file photo
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एक तरफ तो केंद्र सरकार गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी के लिए सुरक्षित मातृत्व अभियान चला रही है। इसके लिए निजी अस्पतालों को भी माह में एक दिन सहयोग करने की नसीहत दी जा रही है। लेकिन सिविल अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 
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यूं तो प्रदेश व केंद्र सरकार गर्भवती महिलाओं को कई प्रकार की सुविधाएं देने के दावे कर रही है। कहने को तो इसके लिए करोड़ों रुपए के बजट का प्रावधान भी है, लेकिन आपातकालीन समय पर कोई मशीन खराब हो जाए, तो उन्हें ठीक कराने में कई-कई दिन लग जाते हैं। 

 जिला स्तरीय सिविल अस्पताल में पिछले पांच दिनों से अल्ट्रासाउंड सेवाएं ठप पड़ी हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इसके लिए अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर यह लिखकर कि मशीन खराब है, अल्ट्रासाउंड नहीं होंगे। अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। शनिवार की देर रात अस्पताल में डिलीवरी के लिए आई एक गर्भवती को तो रात के समय निजी अस्पतालों के धक्के खाने पड़े,  700 रुपए में अल्ट्रासाउंड़ कराने के बाद डिलीवरी हुई।  
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700 रुपए में कराया अल्ट्रासाउंड 

-शनिवार रात समीप के एक गांव की महिला को  सिविल अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती कराया गया। गर्भवती महिला की सास के अनुसार रात के करीब दस बजे अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों ने उनसे कहा कि अस्पताल की अल्ट्रासाउंड़ मशीन तो खराब है। इसलिए बाहर से जाकर अल्ट्रासाउंड कराना होगा। सिके चलते उसे अपनी बहू को एक निजी अस्पताल ले जाना पड़ा। आपातकालीन समय में उस निजी अस्पताल के संचालकों ने उससे अल्ट्रासाउंड़ की जांच फीस 700 रुपए ऐंठ ली, जोकि तय रेटों से कॉफी अधिक  है। 
 
कोट 
-14 जुलाई से अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन खराब पड़ी हुई है। इसकी वजह से गर्भवती महिलाओं को परेशानी  हो रही है। मशीन खराब होने की सूचना हमने कंपनी के कर्मचारियों को दे दी है। आज कंपनी की तरफ से मैकेनिक आ गया है। चैक करने के बाद पता चलेगा मशीन कब तक ठीक हो पाएगी। -डॉ. बीर सिंह सहरावत, एसएमओ। 
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