पलवल। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर कृषि कानूनों के विरोध में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर किसानों का धरना बुधवार को भी जारी रहा। इस दौरान किसानों ने कहा कि दिल्ली कूच के लिए रणनीति बनाई जा रही है। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में किसान भाजपा सरकार का विरोध करेंगे। किसानों का विरोध करने वाले नेताओं के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। किसान कृषि कानूनों की वापसी तक आंदोलन जारी रखेंगे।
किसान नेता मास्टर महेंद्र चौहान और श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि सत्ता में बैठी दोनों पार्टियों में कुछ ऐसे नेता हैं, जो केन्द्र सरकार के तीनों कृषि विरोधी कानूनों के खिलाफ हैं। लेकिन, सत्ता के दबाव में वे खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने 26 जून 2020 को लॉकडाउन के दौरान एक और काला कानून पारित किया था। इसके अंतर्गत देश में चल रहे ढाबे बंद किए जाएंगे। इससे लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। सरकार की मनसा है कि ढाबों को बंद कराकर पूंजीपतियों के हाथों में दे दिया जाए। सरकार गांव, गरीब और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की अपेक्षा, उन्हें बर्बाद करने पर तुली है।
किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में जारी धरने की अध्यक्षता इंद्र सिंह रावत ने की, जबकि संचालन राजकुमार ओलिहान ने किया। धरने को किसान सभा के नेता धर्मचंद घुघेरा, अच्छेलाल जोधपुर, प्रोफेसर रघुवीर सिंह, रोशनलाल अल्लीका, हुकम सिंह अटोहां, बिजेंद्र बढ़राम, इंद्र सिंह रावत, रमेश चिरवाड़ी, गयालाल, जगदीश रावत, राजेश रावत बहीन और करतार औरंगाबाद सहित अन्य ने संबोधित किया।