संवाद न्यूज एजेंसी
तावड़ू। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र छपेड़ा, नूंह के वरिष्ठ समन्वयक डॉ. विनोद कुमार मोहन ने गेहूं की फसल को लेकर जिले के किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। उन्होंने कहा कि गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्म के प्रमाणित बीज का चयन, समय पर बिजाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और खरपतवार नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है। डॉ. मोहन ने बताया कि हरियाणा सहित उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में गेहूं की अगेती बिजाई अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में और समय पर बिजाई नवंबर के मध्य तक करना उपयुक्त रहता है। किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और सिंचाई की उपलब्धता के अनुसार ही कृषि विश्वविद्यालय द्वारा सिफारिश की गई उन्नत किस्मों का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि प्रमाणित बीज का ही प्रयोग करें और बीजोपचार अवश्य करें।
खेत में खाद डालने से पहले मिट्टी की जांच कराएं ताकि संतुलित पोषण दिया जा सके। धान की कटाई के बाद पराली बिल्कुल न जलाएं, बल्कि सुपर सीडर जैसी आधुनिक मशीनों से फसल अवशेष प्रबंधन करते हुए बिजाई करें, इससे समय की बचत होगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। खरपतवार प्रबंधन के बारे में उन्होंने कहा कि गेहूं में कनकी, जंगली जई, जंगली पालक जैसे खरपतवारों की समय पर रोकथाम जरूरी है, इसके लिए किसान विशेषज्ञों की सलाह लेकर बिजाई के शुरुआती दिनों में ही उचित प्रबंधन करें।