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निजीकरण के खिलाफ किसानों ने किया प्रदर्शन, लघु सचिवालय तक जुलूस निकाला

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पलवल में जुलूस निकालते किसान। - फोटो : Palwal
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पलवल। सरकारी विभागों के निजीकरण, तेल, गैस और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ सोमवार को किसान और मजदूर संगठनों ने जिला लघु सचिवालय पर प्रदर्शन किया। किसान जुलूस निकालकर सचिवालय में पहुंचे। इस अवसर पर किसान संघर्ष समिति के तत्वावधान में सीओ जिला परिषद अमित गुलिया को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इस अवसर पर किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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अध्यक्षता करते हूए स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि सरकार ने बजट में 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का जो लक्ष्य रखा है, यह रकम सरकारी विभागों और वित्तीय संस्थानों में सरकारी हिस्सेदारी बेचकर जुटाई जाएगी। कुछ दिन पहले देश के प्रधानमंत्री ने कहा था कि व्यवसाय करना सरकार का काम नहीं है। सरकारी विभागों और बैंकों को महज व्यापार के दृष्टिकोण से न देखकर यह समझना चाहिए कि इनके कारण देश की अर्थव्यवस्था को कितना बल मिलता है। 1969 में 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण यह कहकर किया था कि निजी बैंक अपनी सामाजिक जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं। पिछले कुछ सालों में जिस तरह से निजी बैंक डूबते चले गए, उससे यह तर्क भी कमजोर पड़ता है कि निजी बैंक बेहतर काम करते हैं।
मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि सरकार ने तेल, स्टील, दूरसंचार, रेलवे, एयरपोर्ट, कोयला खदान व बिजली सहित कई क्षेत्रों का निजीकरण करना शुरू कर दिया है। प्रदर्शन के दौरान निर्णय लिया गया कि 23 मार्च को संयुक्त किसान मजदूर पैदल यात्रा के समापन के अवसर पर धरनास्थल पर शहीद दिवस मनाया जाएगा। पैदल यात्रा की सफलता के लिए किसान संघर्ष समिति की तीन टीमें गांव का लगातार दौरा करके बैठकें कर रही हैं। बैठकों में किसानों से ज्यादा से संख्या में धरना स्थल पर पहुंचने की अपील की जा रही है। इसका संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। प्रदर्शन में किसान नेता रतन सिंह सौरौत, नवल सिंह, योगेश शर्मा, राजकुमार ओलिहान, यूएम खां, सोहनपाल चौहान, भागीरथ बैनीवाल, दरयाब सिंह, सतीश भुर्जा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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