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57 दिन बाद किसानों की हुई घर वापसी, गतिरोध हुआ समाप्त

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57 दिन बाद घर वापस लौटे किसान
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पलवल। जिला पुलिस अधीक्षक दीपक गहलावत द्वारा दिए गए 24 घंटे का अल्टीमेटम पूरा होने से पहले ही किसानों की घर वापसी शुरू हो गई। पिछले दो माह से दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहा किसानों का धरना समाप्त हो गया। बृहस्पतिवार सुबह क्षेत्रीय किसानों के न पहुंचने व पुलिस के निरंतर दबाव के कारण मध्य प्रदेश व बुंदेलखंड के किसानों ने सामान समेटना शुरू कर दिया। मौके पर पहुंचे राष्ट्रीय किसान मजदूर महासभा के अध्यक्ष शिवकुमार कक्का ने जिला उपायुक्त से मुलाकात की।
गणतंत्र दिवस पर निकाली गई ट्रैक्टर परेड के बाद केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर पिछले 57 दिन से चल रहा किसानों का धरना समाप्त कर दिया गया। बुधवार देर शाम जिला पुलिस अधीक्षक दीपक गहलावत ने किसानों को घर लौटने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। बृहस्पतिवार सुबह धरना स्थल पर सीआरपीएफ, आईटीबीपी, रैपिड एक्शन फोर्स सहित बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया। अवरोधकों को हटाने के लिए क्रेन मंगवा ली गई। पुलिस कर्मी धरना स्थल पर तैनात किसानों के नाम व पते लिखने लगे। धरना स्थल पर पहुंचे कुछ क्षेत्रीय किसानों के पुलिस ने नाम पूछे तो वे वापस लौट गए। पुलिस ने किसानों को जल्दी से जल्दी धरना स्थल खाली करने की चेतावनी दी। चेतावनी के बाद बुंदेलखंड व मध्य प्रदेश के किसानों ने सामान समेटने के लिए समय मांगा, जिसके बाद पुलिस बैरिकेड हटाने के काम में जुट गई।
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सामान ले जाने में आई परेशानी
बृहस्पतिवार सुबह किसानों को वापस लौटने की चेतावनी के बाद किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। रोजाना हजारों लोगों के लिए लंगर बनाने के लिए लाए गए सामान को समेटना व उसे वापस ले जाना चुनौती पूर्ण रहा। लंगर सेवा में जुटे तालाबंदी गुरुद्वारा मध्य प्रदेश, गुरू का ताल आगरा व पटियाला के किसानों को सामान ले जाने के लिए वाहन नहीं मिले। किसानों ने जैसे-तैसे व्यवस्था कर अपने सामान को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में लोड किया।
ग्वालियर में मजबूती से जारी रखेंगे आंदोलन
धरने की अगुवाई कर आए ग्वालियर के किसानों ने कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन जारी रहेगा। वे दिल्ली कूच के लिए आए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। अब वे केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के गृह जिले ग्वालियर में पूरी मजबूती के साथ आंदोलन करेंगे। ग्वालियर में कानूनों के विरोध में धरना शुरू किया जाएगा। किसान भूपेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि पुलिस ने किसानों के साथ अन्याय कर रही है। ट्रैक्टर परेड के दौरान उन्हें बेरहमी से पीटा गया। बुधवार को पूरी रात उन्हें सोने नहीं दिया गया। बार-बार किसानों को वापस लौटने के लिए धमकी देती रही, जिसके बाद किसान वापस लौट रहे हैं।
ट्रैक्टरों में हुए नुकसान की भरपाई की
गणतंत्र दिवस पर निकाली गई ट्रैक्टर परेड के दौरान हुए उपद्रव में ट्रैक्टरों में हुए नुकसान की किसान संघर्ष समिति ने भरपाई की। जिन किसानों को ट्रैक्टरों में नुकसान हुआ था, उनसे काम कराने का बिल लेकर भुगतान कर दिया गया। मास्टर महेंद्र चौहान ने सभी किसानों को भुगतान कर उनके हस्ताक्षर करवा लिए।
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सरकारी की साजिश का करेंगे खुलासा : कक्का
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार कक्का बृहस्पतिवार को धरना स्थल पर पहुंचे। किसान धरना समेटते हुए मिले तो कक्का ने जिला उपायुक्त से मुलाकात की। जिला उपायुक्त ने धरना समाप्त करने के लिए कुछ समय दिया। शिवकुमार कक्का ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर हुई साजिश का साक्ष्यों के साथ खुलासा करेंगे। जिन किसानों के यह कृत्य किया है, उनकी यूनियन शुरू से आंदोलन से दूरी बनाए हुए थी। सरकार ने सोची-समझी साजिश के तहत ये काम कराया है। उन्होंने कहा कि 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उपवास रखा जाएगा। कृषि कानूनों को लेकर किसानों का धरना जारी रहेगा।
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